कहा- आने वाले दशकों तक याद रखा जाएगा उनका खेल
नई दिल्ली : मैनचेस्टर टेस्ट में भारत की पहली पारी 358 रन पर समाप्त हुई। हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा में ऋषभ पंत रहे। वह पैर की टूटी अंगुली के साथ बल्लेबाजी करने आए और अर्धशतक जड़ा। भारत के पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने कहा है कि पंत का फ्रैक्चर के साथ बल्लेबाजी के लिए उतरना 2002 में अनिल कुंबले का टूटे जबड़े के साथ गेंदबाजी करते हुए ब्रायन लारा को आउट करने की तरह याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पारी भारतीय उप-कप्तान की टीम के प्रति प्रतिबद्धता और बहादुरी का प्रमाण है।
पंत इंग्लैंड के खिलाफ चौथे टेस्ट के पहले दिन क्रिस वोक्स की गेंद पर रिवर्स स्वीप करने की कोशिश में 37 रन पर रिटायर्ड हर्ट हो गए। स्कैन से पता चला कि उनके दाहिने पैर के अंगूठे में फ्रैक्चर हो गया है। दूसरे दिन वह क्रीज पर वापस लौटे और दर्द के बावजूद खेलते हुए उन्होंने अर्धशतक बनाया और दो साझेदारियों में भी योगदान दिया। उन्होंने कई रिकॉर्ड भी अपने नाम किए।
मांजरेकर ने जियो हॉटस्टार से कहा, 'जब आप इस तरह की चीजें करते हैं जैसे अनिल कुंबले का जबड़े पर पट्टी बांधकर गेंदबाजी करना तो ये इतिहास के वो पल होते हैं जिन्हें आप 50 साल बाद भी याद रखेंगे। यह दर्शाता है कि वह भारत के लिए खेलने को कितने प्रतिबद्ध हैं। टेस्ट क्रिकेट में कुछ खास बात होती है, खासकर जब यह इंग्लैंड में खेला जा रहा हो। एक क्रिकेटर के तौर पर आपके ऊपर कितना ध्यान होता है। यहीं वह अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहते हैं। अगर आपको हैरानी हो रही है कि उन्होंने सफेद गेंद के क्रिकेट में वैसा प्रभाव क्यों नहीं डाला तो शायद यही वजह है। क्योंकि पंत किसी भी अन्य प्रारूप से ज्यादा टेस्ट क्रिकेट पर अपनी छाप छोड़ना चाहते हैं।'
मांजरेकर को लगता है कि मैदान पर जाकर बल्लेबाजी करना पूरी तरह से पंत का फैसला था। उन्होंने कहा, 'जब हमने ऋषभ पंत को गौतम गंभीर के साथ बातचीत करते देखा तो वह सफेद कपड़ों में थे। हमें लगा कि शायद वह पारी के अंत में बल्लेबाजी करने आएंगे। किसने सोचा था कि वह अगला विकेट गिरने के बाद मैदान पर उतरेंगे? वह चोटिल हैं, लेकिन इस खिलाड़ी को नजरअंदाज मत कीजिए। अगर किसी दिन उसे बताया जाए कि वह अपने पैर नहीं हिला सकता तो भी उसके हाथ-आंख का समन्वय इतना शानदार है कि वह फिर भी हावी हो जाएगा।'
उन्होंने कहा, 'इसलिए इंग्लैंड को चिंता होगी कि पंत वापस आ गया है। हालांकि वह साफ तौर पर दर्द में दिख रहे थे। यह पूरी तरह पंत का फैसला है। उन्होंने तय किया कि मैं मैदान पर जाऊंगा।' पंत ने चोट के बावजूद 75 गेंदों में तीन चौके और दो छक्कों की मदद स 54 रन बनाए। इसमें जोफ्रा आर्चर की गेंद पर डीप स्क्वायर लेग में लगाया गया छक्का भी शामिल है। पंत की हिम्मत की इंग्लिश खिलाड़ियों ने भी दाद दी। जब पंत आउट होकर वापस जा रहे थे, तो जो रूट ने उनकी पीठ थपथपाई। दर्शकों ने भी खड़े होकर उनके लिए तालियां बजाईं।


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