केंद्रीय नीतियों पर उठाए सवाल, आम आदमी की चिंता व्यक्त की
नई दिल्ली।अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारत का रुपया रिकॉर्ड स्तर पर नीचे जा चुका है। कमजोर होते जा रहे रुपये में लगातार हो रही गिरावट को लेकर राहुल गांधी ने चिंता जताई है। पश्चिम एशिया में वैश्विक ताकतों के टकराव से उपजे तनाव के कारण महंगाई को लेकर आगाह करते हुए राहुल गांधी ने एक्स पर विस्तार से पोस्ट लिखा। उन्होंने कहा, सरकार भले ही हालात सामान्य होने का दावा करे, लेकिन सच्चाई कुछ और है। उन्होंने उद्योग जगत में इस्तेमाल किए जाने वाले ईंधन के महंगे होने का जिक्र करते हुए लिखा कि ये महज आंकड़े नहीं आने वाली महंगाई के साफ संकेत हैं।
राहुल गांधी ने किन मुद्दों पर सरकार को घेरा?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल के साथ-साथ रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतों में भी उछाल की आशंका व्यक्त की है। उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में आने वाले दिनों में दाम बढ़ाए जाने का जिक्र कर लिखा, 'उत्पादन और ट्रांसपोर्ट महंगे होंगे।'
शेयर बाजार पर भी असर पड़ेगा
राहुल गांधी ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) पर सर्वाधिक असर पड़ने की बात भी कही। उन्होंने लिखा, 'MSMEs को सबसे ज्यादा चोट लगेगी, रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ेंगे।' आने वाले दिनों में शेयर बाजार पर असर पड़ने का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का भी उल्लेख किया। राहुल ने कहा कि एफआईआई का पैसा तेजी से बाहर जाएगा, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बढ़ेगा।
पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को लेकर केंद्र सरकार को घेरते हुए राहुल ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, 'हर परिवार की जेब पर इसका सीधा और गहरा असर पड़ना तय है। और यह सिर्फ वक्त की बात है-- चुनाव के बाद पेट्रोल, डीजल, एलपीजी की कीमतें भी बढ़ा दी जाएंगी।' उन्होंने आगे लिखा, 'मोदी सरकार के पास न दिशा है, न रणनीति- सिर्फ बयानबाजी है। सवाल यह नहीं कि सरकार क्या कह रही है- सवाल यह है कि आपकी थाली में क्या बचा है।'
गौरतलब है कि विगत 28 फरवरी से शुरू हुआ ईरान और अमेरिका-इस्राइल टकराव बीते 22 दिनों से जारी है। युद्ध की आंच खाड़ी देशों के अलावा अब भारत तक भी पहुंचने लगी है। भारत आने वाले तेल और गैस के जहाजों को होर्मुज क्षेत्र से गुजरने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भारत से फल-सब्जियां निर्यात करने वाले किसान भी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि जल्द ही शांति बहाल न होने की सूरत में पश्चिम एशिया की इस लड़ाई के दीर्घकालिक असर दिखेंगे।


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