बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव, ‘कट मनी प्रथा’ पर लगा ब्रेक
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी सत्ता संभालते ही पूरी तरह एक्शन मोड में आ गए हैं। राज्य में करीब 15 साल पुराने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन को समाप्त कर सत्ता में आई नई सरकार अब पिछले कई फैसलों और व्यवस्थाओं को बदलने की तैयारी कर रही है। विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जिस 'कट मनी' (जबरन वसूली और अवैध कमीशन) के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था, सरकार बनते ही मुख्यमंत्री ने उस पर पूरी तरह से रोक लगाने की दिशा में कड़ा रुख अपना लिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि राज्य में कट मनी वसूली के सबूत मिलने पर दोषियों के खिलाफ बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर से दी सीधी चेतावनी
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर क्षेत्र का दौरा किया, जहाँ उन्होंने विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को मात दी थी। इस दौरान स्थानीय जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य से जबरन वसूली और 'कट मनी' जैसी कुप्रथाओं को जड़ से खत्म करने का दृढ़ संकल्प दोहराया। उन्होंने आम जनता से कहा कि यदि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के बदले कोई भी व्यक्ति या अधिकारी उनसे रिश्वत या कमीशन की मांग करता है, तो वे इसके खिलाफ आवाज उठाएं। शिकायतकर्ता द्वारा जरूरी दस्तावेज या प्रमाण पेश करते ही आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। इस मौके पर उन्होंने ममता बनर्जी पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि अब उनका राजनीतिक करियर पूरी तरह समाप्त हो चुका है।
डिजिटल सबूतों को माना जाएगा कानूनी आधार
मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को डिजिटल रूप देते हुए कहा कि रिश्वतखोरी या कमीशन के लेन-देन से जुड़े किसी भी प्रकार के डिजिटल दस्तावेज या सबूतों को पूरी तरह मान्य माना जाएगा। इन डिजिटल साक्ष्यों को भारतीय न्याय संहिता (पहले आईपीसी) के तहत कानूनी रूप से वैध मानकर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। भवानीपुर की जनसभा में उन्होंने यह दावा भी किया कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन और उनकी सरकार बनने के बाद से सीमा पार और जमात जैसे असामाजिक तत्वों की रात की नींद उड़ गई है।
आखिर क्या है यह 'कट मनी' प्रथा?
नई सरकार द्वारा जिस 'कट मनी' प्रथा को बंद करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है, वह असल में एक प्रकार का अनौपचारिक और अवैध कमीशन है। सरल शब्दों में कहें तो यह सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के बदले नेताओं या बिचौलियों द्वारा की जाने वाली अवैध उगाही है। पिछले शासनकाल के दौरान विपक्ष द्वारा लगातार यह आरोप लगाए जाते थे कि स्थानीय टीएमसी नेता अपने क्षेत्रों में किसी भी सरकारी अनुदान, निर्माण कार्य या लोक कल्याणकारी योजना का लाभ आम जनता और ठेकेदारों तक पहुँचाने के एवज में एक निश्चित हिस्सा (कट मनी) अपने पास रख लेते थे। अब सुवेंदु सरकार द्वारा इस पर पूरी तरह पाबंदी लगाने के बड़े फैसले के बाद देखना होगा कि जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की इस व्यवस्था पर कितना लगाम लग पाता है।


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