INDIA गठबंधन की नई रणनीति, हर दो महीने में होगा मंथन
नई दिल्ली: विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (INDIA Block) को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और भविष्य की रणनीतियों को धार देने के लिए एक बड़ा फैसला लिया गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ऐलान किया है कि अब आपसी समन्वय और एकजुटता को बनाए रखने के लिए हर दो महीने में इंडिया ब्लॉक के प्रमुख नेताओं की एक बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी। इसी कड़ी में गठबंधन की अगली महत्वपूर्ण और बड़ी रणनीतिक बैठक अगस्त के महीने में तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में होना तय हुआ है, जहां देश के मौजूदा राजनीतिक हालातों और विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर गहन मंथन किया जाएगा।
समन्वय बढ़ाने के लिए लिया गया अहम फैसला
मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया कि विपक्षी दलों के बीच लगातार संवाद बने रहना बेहद जरूरी है। पहले कई मौकों पर बैठकों में लंबा अंतराल होने की वजह से गठबंधन के भीतर कुछ मुद्दों पर मतभेद या संवादहीनता की स्थिति देखने को मिली थी। इसी कमी को दूर करने के लिए अब यह नियम बनाया गया है कि सभी घटक दल हर दो महीने में एक मंच पर आकर चर्चा करेंगे। इस नियमित अंतराल पर होने वाली बैठकों से न केवल राज्यों के स्तर पर चल रहे आपसी मुद्दों को सुलझाया जा सकेगा, बल्कि सरकार की नीतियों के खिलाफ संसद से लेकर सड़क तक एक साझा और मजबूत फ्रंट तैयार करने में मदद मिलेगी।
हैदराबाद में जुटेंगे विपक्ष के दिग्गज नेता
अगस्त में हैदराबाद में होने वाली इस बैठक को बेहद खास माना जा रहा है। दक्षिण भारत के इस प्रमुख राजनीतिक केंद्र में होने वाले इस मंथन में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आरजेडी, वामपंथी दलों सहित गठबंधन के सभी 20 से अधिक दलों के शीर्ष नेता शामिल होंगे। इस बैठक की मेजबानी तेलंगाना के स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व द्वारा की जाएगी। इस बैठक का मुख्य एजेंडा देश की आर्थिक स्थिति, बेरोजगारी, किसानों से जुड़े मुद्दे और केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग के खिलाफ एक साझा आंदोलन की रूपरेखा तैयार करना है।
आगामी चुनौतियों के लिए एकजुटता पर जोर
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में भविष्य में होने वाले विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों और अन्य राजनीतिक चुनौतियों को लेकर भी एक साझा न्यूनतम कार्यक्रम (कॉमन मिनिमम प्रोग्राम) पर चर्चा हो सकती है। विपक्षी नेताओं का मानना है कि यदि सभी दल नियमित रूप से मिलते रहेंगे, तो आपसी भरोसा और मजबूत होगा जिससे जनता के बीच भी एक सकारात्मक और एकजुट विपक्ष का संदेश जाएगा। हैदराबाद की यह बैठक विपक्षी गठबंधन को एक नई दिशा देने और सरकार को घेरने की रणनीति में मील का पत्थर साबित हो सकती है।


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