गंगा एक्सप्रेसवे बना रोजगार का हब, स्थानीय युवाओं को मिलेगा फायदा
ग्राउंड रिपोर्ट: गंगा एक्सप्रेसवे – तकनीक, सुरक्षा और रोजगार का महामार्ग
लखनऊ| सुबह के 9:00 बजे: गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण खंड (पैकेज) पर सूरज की नर्म रोशनी के साथ हलचल तेज हो चुकी है। दूर तक फैली नवनिर्मित डामर की सड़क पर सफेद पट्टियां चमक रही हैं। हर किलोमीटर पर स्थापित आधुनिक कैमरे इस बात का प्रमाण हैं कि इस एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा और निगरानी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए जाने से पूर्व, इस एक्सप्रेसवे की जमीनी हकीकत का जायजा लेने पर सुरक्षा, तकनीक और रोजगार के मोर्चों पर एक बदलती हुई तस्वीर दिखाई देती है।
एआई (AI) कैमरों से लैस 'स्मार्ट' निगरानी
पूरे 594 किलोमीटर के सफर में हर एक किलोमीटर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कैमरे लगाए गए हैं। साइट इंजीनियरों के अनुसार:
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ये कैमरे न केवल वाहन की गति (Speed) मापेंगे, बल्कि सीट बेल्ट, लेन अनुशासन और खतरनाक ड्राइविंग पर भी पैनी नजर रखेंगे।
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यह सिस्टम सीधे कंट्रोल रूम और परिवहन विभाग से जुड़ा है, जिससे नियमों के उल्लंघन पर तत्काल ई-चालान जेनरेट होगा और वाहन स्वामी के मोबाइल पर संदेश पहुंच जाएगा।
अत्याधुनिक स्विस तकनीक: सड़क की 'डायनामिक टेस्टिंग'
सड़क की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रखने के लिए प्रदेश सरकार ने पहली बार स्विस तकनीक का उपयोग किया है।
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सेंसर आधारित जांच: निर्माण के दौरान ही 'ईटीएच ज्यूरिख' और 'आरटीडीटी लैबोरेटरीज एजी' द्वारा विकसित एआई मॉड्यूल और सात हाई-प्रिसिजन सेंसरों का उपयोग किया गया।
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सटीक डेटा: चार सेंसर सड़क की सतह की एकरूपता जांचते हैं, जबकि तीन सेंसर वाहन के कंपन और यात्रियों के आराम (Comfort) का डेटा एकत्र करते हैं।
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तुरंत सुधार: चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर महावीर के अनुसार, इसे 'डायनामिक टेस्टिंग' कहा जाता है, जहाँ लैब के बजाय सीधे सड़क पर वाहन चलाकर कमियों को चिह्नित और दुरुस्त किया गया है।
रोजगार और आर्थिक प्रभाव
गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि रोजगार का एक बड़ा जरिया बनकर उभरा है:
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518 गांवों के 5700 युवाओं को इस प्रोजेक्ट के माध्यम से सीधा काम मिला है।
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इसमें से 1200 लोग टोल संचालन में, 2500 श्रम कार्यों में और लगभग 2000 लोग अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं।
मंत्री का संदेश: औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे प्रयागराज के व्यापार, सेवा क्षेत्र और संगम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। यह नए उत्तर प्रदेश की सशक्त सोच का प्रतीक है।
बिना रुके कटेगा टोल (स्मार्ट टोलिंग)
एक्सप्रेसवे पर पारंपरिक बाधाओं को खत्म करने के लिए फास्टैग के साथ-साथ ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) तकनीक लगाई गई है। भविष्य में इसे जीपीएस-आधारित टोलिंग से जोड़ा जाएगा, ताकि वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकना न पड़े।
यातायात डायवर्जन और मार्ग निर्देश
सुचारू आवागमन सुनिश्चित करने के लिए भारी वाहनों के लिए निम्नलिखित रूट तय किए गए हैं:
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कानपुर/कन्नौज से सीतापुर-लखनऊ: भारी वाहन कन्नौज बक्सीपुरवा से बिल्हौर होते हुए बांगरमऊ कट (आगरा एक्सप्रेसवे किमी 238) का उपयोग करेंगे।
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फतेहगढ़ से सीतापुर-लखनऊ: भारी वाहनों को हुल्लापुर चौराहे से शाहजहांपुर की ओर मोड़ा जाएगा।


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