‘25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला’, राजनाथ सिंह का बड़ा दावा
नई दिल्ली: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को एक कार्यक्रम के दौरान देश के राजनीतिक नेतृत्व और बदलती रक्षा साख को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी राजनेता या राजनीतिक दल का बार-बार लोकतांत्रिक चुनाव जीतना केवल एक चुनावी कामयाबी नहीं है। असल में, यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि देश की जनता का उस नेतृत्व पर कितना अटूट विश्वास है। इसी दृष्टिकोण के आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक ऐसे जननायक के रूप में उभरे हैं, जिन्हें देश की जनता का लंबे समय से लगातार भरपूर समर्थन मिल रहा है।
कल्याणकारी राजनीति का नया 'भारतीय मॉडल'
रक्षा मंत्री ने वैश्विक अर्थशास्त्रियों का हवाला देते हुए दावा किया कि आज दुनिया भर के विशेषज्ञ भारत के विकास मॉडल को लोक-कल्याणकारी राजनीति (वेलफेयर पॉलिटिक्स) का एक नया और अनूठा प्रतिमान मान रहे हैं। इस मॉडल ने जमीनी स्तर पर लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि आज से 12 साल पहले शायद ही किसी ने यह सोचा होगा कि आने वाला दशक देश के लिए इतना बड़ा बदलाव लेकर आएगा। लेकिन पिछले 12 वर्षों के भीतर हुए अभूतपूर्व सुधारों ने देशवासियों में यह दृढ़ संकल्प जगा दिया है कि भारत अब 'विकसित राष्ट्र' बनने की राह पर अग्रसर है और दुनिया की कोई भी ताकत इस रथ को नहीं रोक सकती।
भ्रष्टाचार मुक्त शासन और 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर
सरकार की साफ-सुथरी छवि और उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए रक्षा मंत्री ने विपक्ष पर भी तंज कसा:
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दाग-मुक्त सरकार: राजनाथ सिंह ने कहा कि विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है, जिससे हमें लोकतंत्र में कोई शिकायत नहीं है। लेकिन बड़ी बात यह है कि इतने सालों में आज तक कोई भी विरोधी हमारी सरकार पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप साबित नहीं कर पाया है।
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ऐतिहासिक गरीबी उन्मूलन: सरकार की नीतियों के चलते देश के 25 करोड़ से ज्यादा नागरिकों को सफलतापूर्वक गरीबी रेखा के जाल से बाहर निकाला गया है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता: आयात से निर्यात का सफर
देश की सैन्य ताकत और रक्षा क्षेत्र में आए क्रांतिकारी बदलावों का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि पहले भारत अपनी छोटी-बड़ी सैन्य जरूरतों के लिए पूरी तरह दूसरे देशों (आयात) पर निर्भर रहता था, लेकिन अब पासा पलट चुका है।साल 2014 से पहले के दौर में भारत में रक्षा उत्पादन बेहद सीमित था और हम बमुश्किल 1000 करोड़ रुपये का सैन्य साजो-सामान ही बाहर भेज पाते थे। मगर आज आत्मनिर्भर भारत की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हम 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक के रक्षा उत्पादों और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों का निर्यात दुनिया भर में कर रहे हैं।"
उन्होंने अंत में जोर देकर कहा कि आज के दौर में भारत की विदेश और रक्षा नीति केवल किसी घटना पर प्रतिक्रिया देने (रिएक्टिव) वाली नहीं रह गई है, बल्कि हमारा देश अब हर क्षेत्र में खुद आगे बढ़कर कदम उठाने वाली (प्रोएक्टिव) महाशक्ति बन चुका है।


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