थिएटर्स में फिल्मों के बीच आखिर क्यों होता इंटरवल
नई दिल्ली। मनोरंजन का असली मजा सिर्फ और सिर्फ थिएटर्स में आता है। बेशक मॉर्डन दौर में ओटीटी का क्रेज बढ़ गया है और लोग बड़े पर्दे से ज्यादा मोबाइल-टीवी स्क्रीन्स पर फिल्में, सीरीज देखना पसंद करते हैं, लेकिन थिएटर्स की अपनी एक अलग परंपरा है और असली सिनेप्रेमी अब भी भारी तादाद में सिनेमाघरों में मूवीज देखना पसंद करते हैं।
लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि थिएटर्स में फिल्मों के बीच में इंटरवल क्यों आता है। आइए आज हम आपको इंटरवल के इतिहास के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।
बॉलीवुड फिल्मों में होता है इंटरवल
फिल्मों के बीच इंटरवल की थ्योरी सिर्फ और सिर्फ भारतीय सिनेमा की मूवीज में मिलती है। इसका इतिहास काफी पुराना है। पुराने समय में एक मूवी में दो इंटरवल होते थे। राज कपूर की मेरा नाम जोकर और संगम का नाम इस मामले में शामिल है। इंटरवल को इंटरमिशन भी कहा जाता है, इसके 4 कारण इस प्रकार हैं-
- फिल्मों में इंटरवल का सबसे पहला कारण रिफ्रेशमेंट है। ऑडियंस एक डेढ़ घंटे लागातर फिल्म देखने के बाद थोड़ा रिलेक्स होना चाहती है और इसी वजह से इंटरवल को किया जाता है।
- कमर्शियल तौर भी इंटरवल की मान्यता अधिक है। बीच मूवी के इंटरमिशन के दौरान मल्टीप्लेक्स में पॉपकॉर्न, कोल्ड ड्रिंक और अन्य फूड आइटम्स की सेल धड़ाधड़ होती है।
- तकनीकि के आधार पर भी इंटरवल होता, क्योंकि भारतीय सिनेमा में रील्स के तहत फिल्मों को दो भागों में बांटा जाता है और हर रील्स को इंटरवल के दौरान ही बदला जाता है।
- बॉलीवुड या साउथ फिल्मों की अवधि ढ़ाई से 3 घंटे लंबी होती है। ऑडियंस बोर न हो और अधिक समय तक सीट पर न बैठे रही, इसके लिए भी इंटरवल लिया जाता है।
इन कारणों को मद्देनजर रखते हुए कहीं न कहीं सिनेमाघरों में फिल्मों के बीच इंटरवल होता है। जो कई मायनों के आधार पर जरूरी भी रहता है।
हॉलीवुड फिल्मों में नहीं होता इंटरवल
आपको ये जानकर हैरानी होगी कि हॉलीवुड फिल्मों में इंटरवल का कॉन्सेप्ट नहीं होता है। इसके पीछे का मुख्य कारण ये है कि अंग्रेजी फिल्मों की अवधि करीब एक डेढ़ या फिर 2 घंटे की होती है, तो इस लिहाज से वहां इंटरवल लेना जरूरी नहीं समझा जाता है। इसके पीछे की वजह हॉलीवुड मूवीज को थ्री एक्स स्ट्रक्चर को ध्यान में रखकर लिखा जाना है, जिसमें इंटरवल को साइड किया जाता है।


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