संयुक्त राष्ट्र ने सराहा भारत, बाल मृत्यु दर में आई भारी कमी
नई दिल्ली। चैत्र नवरात के पावन मौके पर संयुक्त राष्ट्र की तरफ से रिपोर्ट सामने आई है, इस रिपोर्ट में बताया गया हैं कि भारत में बाल मृत्यु दर में भारी गिरावट हुई है। संयुक्त राष्ट्र ने बाल मृत्यु दर में गिरावट को लेकर भारत की जमकर सराहना कर मोदी सरकार की तारीफ की है। वहीं, रिपोर्ट पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। पीएम मोदी ने लिखा कि यूएन की रिपोर्ट में बच्चों की मौत में तेज गिरावट के लिए भारत की तारीफ हुई है। संयुक्त राष्ट्र बाल मृत्युदर अनुमान अंतर-एजेंसी समूह (यूएनआईजीएमई) की ताजा रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, बच्चों की मौत की दर को कम करने में दुनियाभर में हुई तरक्की में भारत अहम योगदान देने वाला देश बना है। रिपोर्ट में बच्चों के बचने के नतीजों को बेहतर बनाने के लिए, खासकर नवजात और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत के मामले में देश की लगातार और बड़े पैमाने पर प्रयास किए गए है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन नतीजों ने मजबूत, केंद्र और राज्यों द्वारा संचालित तथा मानकों पर आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की प्रभावशीलता को दिखाया है। इसमें बताया गया हैं कि भारत ने राष्ट्रीय दृष्टिकोण को जमीनी स्तर पर मापने योग्य परिणामों में बदलने के लिए ठोस प्रयास किए हैं।
नवजात शिशु मृत्यु दर में 70 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जो 1990 में 57 से घटकर 2024 में 17 हो गई है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में 79 फीसदी की भारी गिरावट देखी गई, जो 1990 में 127 से घटकर 2024 में 27 हो गई है।
बीते दो दशकों में भारत ने दक्षिण एशिया क्षेत्र में बच्चों की मृत्यु दर को कम करने की कोशिशों में अहम भूमिका निभाई है। 1990 से पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौतों में 76 फीसदी की कमी आई है और 2000 से 68 फीसदी की कमी आई। इस क्षेत्र में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में काफी कमी आई है। 2000 में हर 1,000 जीवित जन्मों पर 92 मौतों से घटकर 2024 में करीब 32 हो गई है, जो बच्चों के स्वास्थ्य के नतीजों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को दिखाता है। भारत के खास दखल ने निमोनिया, डायरिया, मलेरिया और जन्म से जुड़ी दिक्कतों जैसी रोकी जा सकने वाली बीमारियों से होने वाली मौतों को कम करने में मदद की है।
नवजात शिशु की आवश्यक देखभाल (एनआईसीयू) में भारत के सुधार का खास असर हुआ है। पूरे दक्षिण एशिया में, 2000 से एनआईसीयू वाले बच्चों की मौत के मामले में करीब 60 फीसदी की कमी आई है और 1-59 महीने के बच्चों की मौत की दर में 75 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है। हालांकि दक्षिण एशिया में अभी भी दुनियाभर में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की लगभग 25 फीसदी मौतें होती हैं, लेकिन इस इलाके ने दुनिया भर में सबसे तेजी से कमी की है।


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