निचली अदालत के फैसले में हाई कोर्ट ने किया बदलाव
बिलासपुर | छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने वर्ष 2003 के एक पुराने आपराधिक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपियों को हत्या के प्रयास (धारा 307 आईपीसी) से बरी कर दिया है. कोर्ट ने पाया कि घटना अचानक विवाद और उकसावे में हुई थी, न कि पूर्व नियोजित हत्या के इरादे से. 12 अक्टूबर 2003 की सुबह तकरीबन 7 बजे, शिकायतकर्ता होरीलाल सतनामी ने थाना तखतपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी. विवाद एक बबूल के पेड़ को लेकर हुआ, जिसमें से होकर आरोपी संतराम ने अवैध बिजली कनेक्शन लिया था. जब शिकायतकर्ता और उसका भाई पेड़ काटने लगे, तो आरोपियों ने लाठी और अन्य हथियारों से हमला कर दिया. इस हमले में होरीलाल, कुंवरदास समेत अन्य लोग घायल हुए.
ट्रायल कोर्ट का फैसला
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, बिलासपुर ने 2005 में आरोपियों को धारा 307/149 (हत्या का प्रयास), 147, 148 और 323 आईपीसी के तहत दोषी ठहराते हुए 5 साल तक की सजा सुनाई थी.
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट के जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास ने साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए कहा कि, घटना अचानक हुई, इसमें कोई पूर्व योजना या तैयारी नहीं थी. विवाद पेड़ काटने को लेकर हुआ, जिससे आरोपियों को तत्काल उकसावा मिला. मेडिकल रिपोर्ट में सभी चोटें साधारण पाई गईं, कोई गंभीर या जानलेवा चोट नहीं थी. शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर घातक चोट नहीं पाई गई. इन आधारों पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हत्या के प्रयास के आवश्यक तत्व सिद्ध नहीं होते.
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल चोट लगना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आरोपी का इरादा और परिस्थितियां भी देखी जाती हैं. इसी आधार पर धारा 307 आईपीसी लागू नहीं मानी गई. हाईकोर्ट ने फैसला बदलते हुए धारा 307/149 आईपीसी से बरी कर दिया. इसके स्थान पर धारा 324/149 आईपीसी (खतरनाक साधन से चोट) के तहत दोषी ठहराया. मुख्य आरोपियों (संतराम, सुखीराम, संभू, पंचु) की सजा 9 माह कर दी और धारा 148 आईपीसी की सजा घटाकर 6 माह कर दी गई.
महिला आरोपी को राहत
मामले की पांचवीं आरोपी मुन्नी बाई को बड़ी राहत देते हुए कोर्ट ने उसकी सजा पहले से भुगती गई अवधि (लगभग 3 माह 7 दिन) तक सीमित कर दी. कोर्ट ने यह भी माना कि, सभी आरोपी गैरकानूनी जमाव का हिस्सा थे, उन्होंने साझा उद्देश्य से हमला किया. इसलिए धारा 147, 148 और 149 आईपीसी के तहत दोष सिद्ध है. कोर्ट ने आदेश दिया कि, आरोपी जमानत पर हैं, उन्हें 2 महीने के भीतर सरेंडर करना होगा और शेष सजा काटनी होगी, अन्यथा पुलिस गिरफ्तारी करेगी.


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