समर्थन मूल्य पर एक्सपायरी बीज की बिक्री, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
बिलासपुर|अंबिकापुर में स्थानीय स्तर पर अमानक बीज की पैकिंग करने के बाद उसे धान लगाने के सीजन में बेचने का प्रयास किया गया लेकिन जब कई टन बीज की बिक्री नहीं हो पाई. तब फिर से अब उस धान के पैकेट को फाड़कर बोरों में पैक कर समर्थन मूल्य में बेचने की कोशिश की जा रही थी, जिसे प्रशासन की टीम ने विफल कर दिया है. करीब 3.75 लाख रुपए का धान जप्त किया गया है.
एक्सपायरी धान बीज को समर्थन मूल्य में बेचने का खेल
सवाल उठ रहा है कि आखिर कितने बड़े पैमाने पर नकली बीज जब कंपनियो के नकली रेपर पर पैकिंग हो रही थी तब कृषि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की. माना जा रहा है कि बड़े पैमाने पर बीज माफिया ने नकली बीज बाजार में किसानों को बेच दिया और जो बीज बच गया, उसे अब समर्थन मूल्य में बेचने की तैयारी की जा रही थी. लेकिन फूड विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने गोदाम में दबिश देकर कार्रवाई की.
कैसे हुआ खुलासा?
इस पूरे मामले को लेकर असिस्टेंट फूड ऑफिसर चित्रकांत ध्रुव ने बताया कि अंबिकापुर के सुभाष नगर में केशव मंडल के घर से सुभाष गुहा नामक व्यक्ति के द्वारा रखा गया धान जप्त किया गया है, सूचना मिली थी कि बीज वाले एक्सपायरी धान के पैकेट को फाड़कर उस धान को निकालने के बाद उसे बोरे में पैक किया जा रहा था और पूछताछ में पता चला कि यह धान सूरजपुर जिले के सिलफिली स्थित धान खरीदी केंद्र में बेचने की तैयारी थी इसलिए सभी बोरे में 40-40 किलो के हिसाब से धान को भरा जा रहा था.वही सुभाष नगर निवासी आशीष सील के द्वारा बताया गया कि उनके वार्ड में किराए की एक गोदाम में एक्सपायर धान के पैकेट को काटकर एक्सपायर धान को समर्थन मूल्य में बेचने के लिए काम किया जा रहा था और यह काम लंबे समय से चल रहा था. यह भी पता चला है कि इस धान को इलाहाबाद से मंगाया गया था.
अधिकारियों पर भी उठ रहे सवाल
हालांकि इस पूरे मामले में सूत्रों का दावा है कि इस साल अंबिकापुर में बड़े पैमाने पर अमानक बीज स्थानीय स्तर पर ही माफिया के द्वारा अलग-अलग कंपनियों के बैग में पैक कराया गया था और जब इन बीजों की बिक्री पूरी तरीके से नहीं हो सकी तो बचे हुए बीज को इस तरीके से समर्थन मूल्य में बेचने की तैयारी चल रही थी. ऐसे में इस मामले में कृषि विभाग के अधिकारियों को गंभीरता से जांच करने की जरूरत है और इस बात का पता लगाने की जरूरत है, कि जिन कंपनियों के बैग में कथित रूप से धान बीज पैक किए गए थे क्या वाकई में उन्हीं कंपनियों के द्वारा इसकी सप्लाई की गई थी या फिर उन कंपनियों के नाम पर बड़े स्तर पर नकली बीज की पैकिंग हो रही थी, लेकिन कंपनियों के अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं लगी.प्रिंसिपल की प्रताड़ना ने ली जान! 12वीं के छात्र ने लगाई फांसी, सुसाइट नोट में लिखा – इन्हें माफी नहीं मिलनी चाहिए दूसरा सवाल यह भी है कि बरसात के मौसम में अंबिकापुर के गंगापुर में बड़े स्तर पर बीज पैकिंग का मामला सामने आया, जहां पर नकली बीज पैक किया जा रहा था लेकिन उस मामले में भी अधिकारियों ने कोई कार्यवाही नहीं की, दिखावे के लिए पंचनामा और जांच प्रतिवेदन तैयार किया गया लेकिन किसी भी माफिया को इस पूरे मामले में जेल नहीं भेजा गया. जबकि साफ तौर पर राज्य सरकार और केंद्र सरकार का आदेश है कि ऐसे मामलों में बीज माफिया के खिलाफ कड़ी जांच करने के बाद अपराधिक प्रकरण दर्ज कराना है. यही वजह है कि एक बार अलग तरह से गिरोह का कारनामा सामने आया है.


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