दो साल से वेतन अटका, शिक्षक ने कलेक्टर से की जल्द समाधान की मांग
मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में शिक्षा विभाग की कथित तानाशाही और लापरवाही का एक बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। यहाँ कैलारस विकासखंड के एक प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षक ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) पर कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अनदेखी करने और दुर्भावनापूर्ण तरीके से पिछले 24 महीनों (दो साल) का वेतन रोकने का संगीन आरोप लगाया है। विभागीय प्रताड़ना से तंग आकर पीड़ित शिक्षक ने जिला कलेक्टर के समक्ष न्याय की गुहार लगाई है। शासकीय शिक्षक परशुराम कुशवाह ने कलेक्टर को एक लिखित प्रार्थना पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और रोके गए मानदेय को तुरंत बहाल करने की मांग की है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी अटका हुआ है पारिश्रमिक
पीड़ित शिक्षक परशुराम कुशवाह ने अपने शिकायती पत्र में उल्लेख किया है कि माननीय उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ द्वारा दिए गए फैसले के बाद, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से 23 जनवरी 2026 को एक आधिकारिक पत्र जारी हुआ था। इस पत्र के माध्यम से उन्हें डी.एड. (D.Ed.) परीक्षा पास करने के लिए 3 वर्ष का अतिरिक्त समय दिया गया था और साथ ही उनका रुका हुआ पूरा वेतन तुरंत रिलीज करने का आदेश भी जारी किया गया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके ठीक कुछ दिन बाद, यानी 18 मार्च 2026 को, डीईओ ने किसी वरिष्ठ अधिकारी या अदालत के स्टे ऑर्डर के बिना ही उस राहत वाले आदेश को अचानक रद्द कर दिया। शिक्षक का कहना है कि विभाग द्वारा केवल अपील दायर करने के खोखले तर्क के आधार पर किसी वैधानिक आदेश को तब तक खारिज नहीं किया जा सकता, जब तक कि न्यायपालिका से कोई स्पष्ट स्थगन आदेश (स्टे) न मिल जाए।
"भुखमरी की कगार पर परिवार; कदम उठाने को होऊंगा मजबूर"
शिक्षक परशुराम कुशवाह ने विभाग के अफसरों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे पहले जब उन्होंने जनसुनवाई में अपनी आवाज उठाई थी, तब उन पर मानसिक दबाव बनाकर उनके पक्ष में जारी हुए आदेश को निरस्त करवा दिया गया। इतना ही नहीं, मामले की जांच को भी जानबूझकर पेंडिंग रखा गया और जांच अधिकारी को जरूरी दस्तावेज मुहैया नहीं कराए गए।
कलेक्टर कार्यालय पहुंचे पीड़ित ने बेहद भावुक शब्दों में अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों से पगार न मिलने की वजह से वे गहरे आर्थिक संकट और कर्ज के दलदल में धंस चुके हैं। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि उनके घर में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है और उनका पूरा परिवार दाने-दाने को मोहताज है। शिक्षक ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही उनकी आजीविका बहाल नहीं की, तो तंग आकर उन्हें अपने पूरे परिवार के साथ सामूहिक आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
कलेक्टर से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद
पीड़ित शिक्षक ने मुरैना कलेक्टर से तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि 18 मार्च 2026 के उस तानाशाही निरस्तीकरण आदेश को तुरंत शून्य घोषित किया जाए और 23 जनवरी 2026 के मूल आदेश को फिर से लागू कर उनका रुका हुआ पैसा दिलाया जाए। साथ ही, नियम ताक पर रखकर काम करने वाले दोषी शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाए।


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