भिंड। जिले के भूजल एवं मृदा-जल संरक्षण विभाग के दफ्तर की लचर व्यवस्था और कार्यशैली पर स्थानीय जनता ने गंभीर सवाल उठाए हैं। क्षेत्रीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि इस दफ्तर में कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी नियमित तौर पर ड्यूटी पर नहीं आता है। पूरा का पूरा सरकारी दफ्तर एक अदद चौकीदार के भरोसे रामभरोसे चल रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यहाँ पदस्थ सब इंजीनियर हरिशंकर शाक्य साल भर नदारद रहते हैं और वे सिर्फ 15 अगस्त व 26 जनवरी को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए ही दफ्तर का रुख करते हैं।

बदहाली के आंसू रो रहा है दफ्तर

अधिकारियों और स्टाफ की इस भारी लापरवाही के चलते विभाग के सारे रोजमर्रा के कामकाज पूरी तरह ठप पड़े हैं या फिर चौकीदार के ही भरोसे निपटाए जा रहे हैं। यही नहीं, देखरेख के अभाव में दफ्तर की इमारत और अंदरूनी व्यवस्था भी पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। कमरों में टूटे हुए टेबल-कुर्सियां और कबाड़ फैला नजर आता है। बुनियादी सुविधाओं और जरूरी संसाधनों के अभाव के कारण विभाग से जुड़े आम लोगों के काम लटके हुए हैं, जिससे जनता में भारी आक्रोश है।

ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग

सरकारी बाबुओं और इंजीनियरों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से परेशान होकर क्षेत्र के ग्रामीणों और आम नागरिकों ने जिला प्रशासन से इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की गुहार लगाई है। लोगों की मांग है कि दफ्तर में स्टाफ की नियमित उपस्थिति अनिवार्य की जाए और बदहाल व्यवस्था को तुरंत सुधारा जाए। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासनिक अमला इस गंभीर लापरवाही पर क्या एक्शन लेता है।