डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को प्रेमानंद महाराज का आशीर्वाद: ''आपका सफर अभी बाकी है'
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक बुधवार को विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर पहुंचे, जहां पर उन्होंने दर्शन और पूजा अर्चना की. इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी नम्रता पाठक भी मौजूद रहीं. डिप्टी सीएम ने प्रेमानंद जी महाराज का आशीर्वाद लिया. इस दौरान प्रेमानंद जी महाराज ने डीएम सीएम को भगवत प्राप्ति के बारे में बताया. प्रेमानंद महाराज ने डिप्टी सीएम को भगवत प्राप्ति कैसे होगी, इसकी जानकारी दी.
प्रेमानंद जी महाराज ने इस दौरान कहा कि हमारा मनुष्य जन्म केवल भगवत प्राप्ति के लिए हुआ है, दुर्लभो मानुषो देहो शास्त्रों में जो दुर्लभता कही गई है वह इसलिए कही गई साधन धाम मोक्ष कर द्वारा पाए न जे परलोक समारा सो परत्र दुख पावई सिर धुन धुन पछताए कालह कर्म ईश्वर मिथ्या दोष लगाए. प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि भगवत प्राप्ति कैसे होगी. मनुष्य जन्म भगवत प्राप्ति के लिए हुआ है. जब भी हमारे मन में आता है कि भगवत प्रप्ति कैसे होगा तो सबसे पहले हमारे दिमाग में आता है कि भगवत प्राप्ति का मतलब है कोई साधु-महात्मा बन जाना या एकांत में बैठकर माला जपना ऐसा नहीं है.
प्रेमानंद महाराज ने बताया कैसे होगी भगवत प्राप्ति?
उन्होंने कहा कि हम जो कर्तव्य कर्म कर रहे हैं उसे ईमानदारी से करें और नाम जप करें यहीं भगवत प्राप्ति है. दो बातें भगवान ने आदेश की हैं. माम मुनिश्मर युद्ध च. युद्ध माने अपने कर्तव्य कर्म को करना और मास्मर यानी भगवान का स्मरण करते हुए अपने कर्तव्य को करना. उन्होंने डिप्टी सीएम से कहा कि जो आपको पद मिला है जो आपको समाज सेवा मिली है उसको सच्चाई और पूरी ईमानदारी करें. यदि हम राष्ट्र सेवा की भावना से समाज सेवा की भावना से करें और नाम जप करें तो इसी से भगवत प्राप्ति हो जाएगी. प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि जब युद्ध करने से भगवत प्राप्ति हो सकती है, वहीं तो गला काटना है, तो फिर और तो सब कार्य सहज ही है, सरल ही है.
‘जो विधाता ने लिख दिया वही होगा’
प्रेमानंद जी महाराज ने कहा जब युद्ध करते भगवत स्मरण हो सकता है, तो फिर समाज सेवा करते भी भगवत स्मरण हो किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि प्रलोभन और भय ये दो शब्द ऐसे हैं जो हमको नीचे गिरा देते हैं. किसी से डरना नहीं चाहिए और कोई प्रलोभन नहीं रखना है और जो विधान मेरे प्रभु ने रच दिया है. वह वही विधान भगवान जो करते हैं, उसके विपरीत कुछ भी करने की किसी के पास ताकत नहीं. कोई एक रोम भी उखाड़ सके. जो विधाता ने लिख दिया छठे राव के अंक राई घटे न तिल बड़े रह निशंक बिल्कुल निर्भय रहना चाहिए. भय तो किसी का मानना नहीं चाहिए, अब रह गया प्रलोभन, इससे बचना चाहिए.


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