नेतन्याहू का बड़ा ऐलान, अमेरिकी सहायता से ज्यादा राष्ट्रीय सुरक्षा अहम
तेलअवीव: पश्चिम एशिया में पिछले करीब चार महीनों से चल रहे भीषण युद्ध के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बेहद आक्रामक और विवादास्पद बयान दिया है। उनके इस बयान ने पूरी दुनिया के नीति-निर्माताओं और वैश्विक राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इजरायल को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की वकालत करते हुए साफ कहा कि उनके देश को अब किसी भी विदेशी इमदाद की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने इजरायल को मिलने वाली अमेरिकी वित्तीय सहायता को 'खैरात' करार देते हुए उसे तत्काल रोकने की इच्छा जताई है। नेतन्याहू का मानना है कि इजरायल की आर्थिक स्थिति अब इतनी सुदृढ़ है कि अमेरिकी मदद उनकी जीडीपी (जीडीपी) का महज एक छोटा सा हिस्सा है, जिसे देश खुद वहन करने में पूरी तरह सक्षम है। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को इसी वर्ष से कदम उठाने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
लेबनान से पीछे नहीं हटेगी इजरायली सेना
लेबनान सीमा पर जारी तनाव को लेकर बेंजामिन नेतन्याहू ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) दक्षिणी लेबनान के इलाकों से तब तक एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी, जब तक वहां से हिजबुल्लाह के खतरे का नामोनिशान नहीं मिट जाता। उत्तरी सीमा का दौरा कर सैनिकों का हौसला बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब तक हिजबुल्लाह अत्याधुनिक हथियारों के साथ इजरायल की सीमाओं पर मंडरा रहा है और देश को डराने की कोशिश कर रहा है, हमारी सेना वहां मजबूती से डटी रहेगी। उन्होंने दावा किया कि इजरायल ने लेबनान सरकार की रजामंदी से उसकी सीमा के भीतर करीब 10 किलोमीटर तक एक बफर जोन (सुरक्षा घेरा) तैयार कर लिया है, जिससे हिजबुल्लाह और ईरान बुरी तरह बौखलाए हुए हैं। नेतन्याहू का यह तीखा बयान अमेरिका की मध्यस्थता में हुए उस शांति समझौते के बीच आया है, जिसका मुख्य लक्ष्य हिजबुल्लाह का निशस्त्रीकरण करना था।
ईरान को सीधे हमले की चेतावनी
क्षेत्र में पैदा हो रहे सुरक्षा खतरों पर बात करते हुए इजरायली प्रधानमंत्री ने अपने धुर विरोधी देश ईरान को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि इजरायल अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर सीधा हमला करने से गुरेज नहीं करेगा। उन्होंने याद दिलाया कि इजरायल अपनी सुरक्षा के खातिर पहले भी दो बार ईरान की सीमा में घुसकर ऑपरेशन चला चुका है और अगर हालात बिगड़े, तो वे तीसरी बार भी ऐसा करने से पीछे नहीं हटेंगे।
स्वतंत्र फलस्तीन का विरोध और गाजा पर कूटनीतिक चुप्पी
एक स्वतंत्र फलस्तीनी देश के गठन को लेकर प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने एक बार फिर अपना पुराना और सख्त रुख दोहराया है। उन्होंने दो टूक कहा कि किसी भी सूरत में एक आजाद फलस्तीन राज्य को मान्यता नहीं दी जाएगी, क्योंकि इजरायल सिर्फ और सिर्फ यहूदी समुदाय का राष्ट्र है। वहीं, दूसरी तरफ जब उनसे गाजा पट्टी के भीतर दोबारा यहूदी बस्तियां बसाने की योजनाओं को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने रणनीतिक चुप्पी साध ली। उन्होंने कूटनीतिक अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि राजनीति में कुछ मामलों पर पहले सीधे कदम उठाए जाते हैं और चर्चाएं बाद में होती हैं। अंतरराष्ट्रीय पटल पर हर रणनीति को सार्वजनिक करना जरूरी नहीं होता।


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