मिलों पर करोड़ों का बकाया, किसान परेशान
छत्तीसगढ़ में चीनी उद्योग पर गहराता संकट: सरकारी मिलें 267 करोड़ के घाटे में, किसानों ने दी तालाबंदी की चेतावनी
रायपुर: छत्तीसगढ़ का सहकारी चीनी उद्योग वर्तमान में अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। प्रदेश की चारों प्रमुख सरकारी चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुँच गई है, जिसका सीधा प्रभाव अब राज्य के गन्ना किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ने लगा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, ये मिलें सामूहिक रूप से 267 करोड़ रुपये के भारी संचयी घाटे का सामना कर रही हैं।
किसानों का 83 करोड़ बकाया, 10 दिनों का अल्टीमेटम
मिलों की इस आर्थिक बदहाली की सबसे बड़ी मार गन्ना उत्पादक किसानों पर पड़ी है। वर्तमान में मिलों पर किसानों का कुल 83.39 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है।
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नियमों का उल्लंघन: केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, गन्ना खरीदी के अधिकतम 15 दिनों के भीतर भुगतान हो जाना चाहिए, लेकिन छत्तीसगढ़ में यह प्रक्रिया महीनों से लंबित पड़ी है।
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किसान आंदोलन की सुगबुगाहट: भुगतान में अत्यधिक देरी से नाराज किसानों ने सरकार को 10 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। किसानों का कहना है कि यदि तय समय सीमा के भीतर उनकी मेहनत की कमाई का भुगतान नहीं किया गया, तो वे प्रदेश की चारों चीनी मिलों के गेट पर ताला जड़ देंगे।
मिल-वार बकाये का विवरण
भुगतान के संकट ने विशेष रूप से कबीरधाम और अन्य गन्ना उत्पादक क्षेत्रों को प्रभावित किया है:
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भोरमदेव सहकारी चीनी मिल: यहाँ 84.18 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा गया, जिसमें से अब भी लगभग 26.69 करोड़ रुपये का भुगतान शेष है।
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पंडरिया शुगर फैक्ट्री: इस मिल पर किसानों का 26.32 करोड़ रुपये बकाया है। भुगतान न मिलने के कारण कई किसानों ने मिलों को गन्ने की आपूर्ति (Supply) रोक दी है, जिससे पेराई सत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
उत्पादन में भारी गिरावट: लक्ष्य से कोसों दूर
वित्तीय संकट और किसानों के असहयोग का असर चीनी उत्पादन के आंकड़ों पर साफ दिख रहा है।
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सीजन 2025-26 का हाल: इस वर्ष के लिए 12.64 लाख मीट्रिक टन चीनी उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक मात्र 56,707 मीट्रिक टन का ही उत्पादन हो सका है।
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गिरती क्षमता: भोरमदेव, सरदार पटेल, माँ महामाया और दंतेश्वरी चीनी मिलों में उत्पादन उनकी वास्तविक क्षमता के मुकाबले पिछले तीन वर्षों में लगातार नीचे गिरा है।
राशन दुकानों में किल्लत: आम जनता बेहाल
इस संकट का सीधा असर अब प्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पर भी पड़ रहा है। सरकारी मिलों से चीनी की आपूर्ति कम होने के कारण उचित मूल्य की दुकानों (FPS) में शक्कर का स्टॉक खत्म होने की कगार पर है।
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राशन कार्ड धारक प्रभावित: राज्य के लगभग 50 से 60 प्रतिशत राशन कार्ड धारकों को पिछले कुछ समय से उनके कोटे की चीनी नहीं मिल पा रही है।


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