वैश्विक उथल-पुथल का असर: रुपये में भारी गिरावट, 26 महीने की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज
अप्रैल के महीने में जिस भारतीय रुपए ने जबरदस्त परफॉर्म करते एशिया में सबसे बेहतरीन फॉर्म दिखाया था, वो ही मई में इस तरह से धराशाई होगी किसी ने भी नहीं सोचा था. पूरे एशियाई रीजन में भारत की करेंसी ने सबसे खराब परफॉर्म किया है. ताइवान, कोरिया, सिंगापूर, थाईलैंड, फिलीपींस, इंडोनेशिया जैसी छोटी इकोनॉमी के मुकाबले में भी भारत के रुपए का प्रदर्शन काफी खराब देखने को मिला है. रिपोर्ट के अनुसार टॉप 11 एशियाई देशों में सिर्फ तीन देशों की करेंसी का प्रदर्शन नेगेटिव देखने को मिला है. जिसमें हॉन्गकॉन्ग और जापान भी शामिल है. इन दोनों देशों की करेंसी से भी तुलना करें तो भारत की करेंसी में ज्यादा गिरावट देखने को मिली है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर भारतीय रुपया दूसरे एशियाई देशों के मुकाबले कितना गिरा है.
एशिया में भारतीय रुपए का सबसे खराब प्रदर्शन
टैरिफ अनिश्चितताओं, सीमा तनाव और केंद्रीय बैंक द्वारा आगे मॉनेटरी ढील की उम्मीदों के संयुक्त प्रभाव ने मई में रुपए को एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बना दिया. मई में रुपए में 1.27 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है. जबकि महीने की शुरुआत में डॉलर के मुकाबले में रुपया 84.48 के लेवल पर देखने को मिला था, जो 30 मई तक 85.57 के लेवल पर आ गया. इसका मततब है कि रुपए में डॉलर के मुकाबले में 1.09 रुपए की गिरावट देखने को मिली है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार इस तरह से रुपया एशिया में सबसे अधिक गिरावट वाली करेंसी बन गई है. खास बात तो ये है कि अप्रैल में रुपया 83.94 के लेवल पर पहुंचने के बाद काफी मजबूत हो गया था और तेजी के कई रिकॉर्ड धराशाई कर दिए थे.
क्यों आई रुपए में गिरावट
शिनहान बैंक इंडिया के ट्रेजरी प्रमुख कुणाल सोधानी ने कहा रिपोर्ट में कि टैरिफ अनिश्चितताओं के बीच लंबी रुपए की स्थिति समाप्त हो रही है, जबकि इंपोर्टर कम एडवांस प्रीमियम का लाभ उठा रहे हैं. अप्रैल की शुरुआत में एक साल के डॉलर-रुपये के एडवांस प्रीमियम 2.34 फीसदी से गिरकर 1.94 फीसदी हो गए. कम महंगाई, विकास की संभावनाओं और नरम डॉलर सूचकांक जैसे कुछ सकारात्मक संकेतों ने रुपये को 85.50 के लेवल के आसपास कारोबार करने में मदद की है, लेकिन वैश्विक आर्थिक कारक आगे की कमजोरी को बढ़ा सकते हैं. नई दिल्ली स्थित शोध फर्म एसएस वेल्थस्ट्रीट की फाउंडर सुगंधा सचदेवा ने कहा कि अमेरिकी डॉलर में तेज उछाल, फेडरल रिजर्व के ब्याज दर आउटलुक में अप्रत्याशित बदलाव या भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में देरी निकट भविष्य में आशावाद को कम कर सकती है.
एशिया में सबसे तेज कौन
अगर बात एशिया की दूसरी करेंसी की बात करें तो ताइवान के डॉलर में 6.97 फीसदी की तेजी देखने को मिली है. जोकि एशिया में सबसे बेहतरीन परफॉर्म करने वाली करेंसी बन गई है. वहीं दूसरी ओर कोरियन वोन में 3.30 फीसदी, इंडोनेशियन रुपया में 1.91 फीसदी, थाईलैंड की करेंसी में 1.79 फीसदी, मलेशियन रिंगगिट में 1.39 फीसदी, सिंगापुर के डॉलर में 1.21 फीसदी, चीनी युआन में 1.06 फीसदी, फिलिपींस पेसो में 0.16 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है. खस बात तो ये है कि भारत के अलावा दो और देशों की करेंसी में गिरावट आई है. जिसमें एशिया की बड़ी इकोनॉमी में से एक जपानी येन है. जिसमें 0.53 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है. वहीं हॉन्गकॉन्ग डॉलर में 1.13 फीसदी की गिरावट दिखाई दी है.
शुक्रवार को रुपए में आई गिरावट
इंटरबैंक फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में शुक्रवार को रुपए में शुरुआती तेजी जाती रही और कारोबार के अंत में डॉलर के मुकाबले यह सात पैसे की गिरावट के साथ 85.55 पर बंद हुआ. घरेलू शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल क्रूड ऑयल की की कीमतों में सुधार के कारण रुपया दबाव में रहा. हालांकि, फॉरेन करेंसी ट्रेडर्स ने कहा कि जीडीपी आंकड़ों के जारी होने से पहले निवेशक सतर्क रहे. आंकड़ों के अनुसार रुपया 85.35 पर खुला और कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले 85.25 के हाई लेवल तथा 85.64 के निम्न स्तर के बीच रहने के बाद के अंत में 85.55 पर बंद हुआ, जो अपने पिछले बंद से सात पैसे की गिरावट है. गुरुवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 10 पैसे गिरकर 85.48 पर बंद हुआ.
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि कमजोर घरेलू बाजार और कच्चे तेल की कीमतों में सुधार के कारण रुपये में गिरावट आई. आयातकों की मासांत डॉलर मांग ने भी रुपये पर दबाव डाला. हालांकि, कमजोर अमेरिकी डॉलर सूचकांक और एफआईआई के पूंजी प्रवाह ने गिरावट को सीमित किया. उन्होंने कहा कि कारोबारी अमेरिका के व्यक्तिगत व्यय खपत (पीसीई) मूल्य सूचकांक और व्यक्तिगत आय के आंकड़ों से संकेत ले सकते हैं. डॉलर-रुपया हाजिर मूल्य 85.30 रुपये से 86 रुपये के बीच रहने की उम्मीद है.


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