आरबीआई की सख्ती का असर, रुपये ने पकड़ी रफ्तार
नई दिल्ली। भारतीय रुपये ने ऐतिहासिक निचले स्तर से शानदार वापसी करते हुए गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 151 पैसे की मजबूत रिकवरी दर्ज की है। यह उछाल मुख्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से 'ऑनशोर फॉरवर्ड डिलीवरी मार्केट' में बैंकों की नेट ओपन पोजीशन को सीमित करने के त्वरित कदम का नतीजा है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण मुद्रा बाजार पर अब भी दबाव बना हुआ है।
सोमवार को 95 का चिंताजनक स्तर पार कर गया था रुपया
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को रुपया 94.62 के स्तर पर खुला और जल्द ही 1.6 प्रतिशत (151 पैसे) की तेज बढ़त के साथ 93.19 के स्तर पर पहुंच गया। गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 94.84 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ था और सोमवार को इसने 95 का चिंताजनक स्तर भी पार कर लिया था। रुपये की इस भारी गिरावट को रोकने के लिए आरबीआई को सीधा हस्तक्षेप करना पड़ा। केंद्रीय बैंक ने 27 मार्च, 2026 को जारी एक सर्कुलर के माध्यम से बैंकों के लिए भारतीय रुपये पर 'नेट ओपन पोजिशन' की सीमा 10 करोड़ डॉलर तय कर दी है और बैंकों को 10 अप्रैल तक इस नियम का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
क्रूड में उबाल और शेयर बाजार धड़ाम
रुपये को मिले इस नीतिगत सहारे के बावजूद मैक्रो-इकोनॉमिक चुनौतियां बरकरार हैं:
ग्लोबल मार्केट: डॉलर इंडेक्स 0.32 प्रतिशत बढ़कर 99.77 पर कारोबार कर रहा है, जो दुनिया की अन्य मुद्राओं पर दबाव डाल रहा है।
कच्चा तेल: वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' वायदा बाजार में 4.84 प्रतिशत के बड़े उछाल के साथ 106.06 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
शेयर बाजार: गुरुवार के शुरुआती कारोबार में घरेलू बाजारों में हाहाकार मचा। सेंसेक्स 1,312.91 अंक (1.80%) लुढ़ककर 71,821.41 पर और निफ्टी 410.45 अंक (1.81%) गिरकर 22,383.40 पर आ गया।
विदेशी निकासी: एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 8,331.15 करोड़ रुपये के शेयरों की भारी शुद्ध बिकवाली की है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, "कच्चे तेल की ऊंची कीमत, बढ़ता व्यापार घाटा, घटते रेमिटेंस की आशंका और लगातार FPI बिकवाली एक साथ मिलकर रुपये पर भारी दबाव डाल रहे हैं"। 28 फरवरी, 2026 को पश्चिम एशिया युद्ध शुरू होने के बाद से रुपये में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है और मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में मुद्रा डॉलर के मुकाबले लगभग 10 प्रतिशत कमजोर हुई है।
जीएसटी कलेक्शन में तेजी
विदेशी मोर्चे पर चुनौतियों के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था से एक बड़ी राहत की खबर है। बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आयात और घरेलू बिक्री में तेजी के दम पर मार्च में जीएसटी राजस्व लगभग 9 प्रतिशत बढ़ा है। टैक्स कलेक्शन 2 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गया है, जो 2025-26 के वित्तीय वर्ष में तीसरी सबसे बड़ी मासिक वसूली है।
अब आगे क्या?
रिजर्व बैंक की ओर से उठाए गए कदमों से गिरता रुपया फिलहाल थम गया है। लेकिन रिकॉर्ड महंगाई और कच्चे तेल की कीमतें जो 106 डॉलर का स्तर पार कर चुका है, से भारत का आयात बिल बढ़ना तय है। ऐसे में आने वाले समय में रुपये की स्थिरता बहुत हद तक पश्चिम एशिया के तनाव और विदेशी निवेशकों (एफपीआई) की वापसी पर निर्भर करेगी।


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