रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूलों में किसी भी वजह से बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले (ड्रॉप आउट) छात्र-छात्राओं को लेकर राज्य सरकार ने एक बड़ा और संवेदनशील फैसला किया है। अब ऐसे सभी बच्चों की स्कूली शिक्षा को छत्तीसगढ़ सरकार अपने स्तर पर पूरा करवाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने इसके लिए अपनी व्यापक कार्ययोजना तैयार कर ली है और जमीनी स्तर पर इस पर तुरंत काम शुरू होने जा रहा है। शासन की ओर से सभी शासकीय स्कूलों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं कि आगामी 31 जुलाई तक हर हाल में ड्रॉप आउट बच्चों को दोबारा मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनका री-एडमिशन (पुनः दाखिला) कराया जाए।

गौरतलब है कि यू-डाइस प्लस (U-DISE+) डेटा की हालिया रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर पर छात्र-छात्राओं के बड़े पैमाने पर स्कूल छोड़ने की चिंताजनक बात सामने आई थी। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद शिक्षा विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है और बच्चों को वापस स्कूल लाने के लिए एक ठोस रोड मैप तैयार किया गया है।

दस्तावेजी फर्जीवाड़ा रोकने के लिए दूसरे स्कूल के प्राचार्यों को जांच की जिम्मेदारी

इस अभियान को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू करने के लिए सरकार ने एक विशेष रणनीति बनाई है। अक्सर देखा जाता है कि ऐसे अभियानों में कुछ संस्थाएं केवल कागजी खानापूर्ति या फाइलों में ही आंकड़े चमका देती हैं। इस बार ऐसी किसी भी गड़बड़ी या फर्जीवाड़े को रोकने के लिए विभाग ने नियम कड़े किए हैं। प्रत्येक स्कूल द्वारा तैयार की गई ड्रॉप आउट बच्चों की सूची की हकीकत जांचने के लिए किसी दूसरे संकुल या स्कूल के प्राचार्य (प्रिंसिपल) को औचक निरीक्षण और सत्यापन का जिम्मा सौंपा जाएगा।

अभियान की समय-सीमा और महत्वपूर्ण चरण

शिक्षा विभाग ने इस पूरी कवायद को समय पर पूरा करने के लिए एक सख्त टाइमलाइन तय की है, जिसका पालन करना सभी ब्लॉक और जिला शिक्षा अधिकारियों के लिए अनिवार्य होगा:

1.चिन्हांकन और सूची निर्माण:15 जून तक.

सभी स्कूलों को अपने क्षेत्र के ऐसे बच्चों की ट्रैकिंग पूरी करनी होगी जो या तो लंबे समय से लगातार बिना सूचना के अनुपस्थित हैं या जिन्होंने पढ़ाई छोड़ दी है। 15 जून तक इनकी अंतिम सूची तैयार करनी होगी।

2.क्रॉस-वेरिफिकेशन और जांच:20 जून को.

तैयार की गई सूचियों की प्रमाणिकता की जांच करने के लिए 20 जून को दूसरे स्कूलों या शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुख (प्राचार्य) संबंधित स्कूलों का दौरा करेंगे और भौतिक सत्यापन करेंगे।

3.ब्लॉक स्तर पर दाखिला अभियान:15 जुलाई तक.

सत्यापित सूची के आधार पर ब्लॉक स्तर (विकासखंड) पर विशेष शिविर और प्रयास करके बच्चों को चिन्हित किया जाएगा और स्कूलों में उनका विधिपूर्वक प्रवेश सुनिश्चित कराया जाएगा।

4.शत-प्रतिशत री-एडमिशन:31 जुलाई (अंतिम तिथि).

संस्थान प्रमुखों को अंतिम अल्टीमेटम दिया गया है कि 31 जुलाई तक हर हाल में चिन्हित ड्रॉप आउट बच्चों का दाखिला स्कूलों में हो जाना चाहिए।कड़ी

कार्रवाई की चेतावनी:

स्कूल शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि यदि इस पूरी प्रक्रिया में कहीं भी लापरवाही, आंकड़ों में हेरफेर या किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित स्कूल प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कड़ी अनुशासनात्मक व दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का लक्ष्य इस सत्र में राज्य के ड्रॉप आउट रेट को शून्य के स्तर पर लाना है।