विधानसभा सत्र से पहले आयोगों की रिपोर्ट पर चर्चा तेज
भोपाल|मध्य प्रदेश में विभिन्न घटनाओं और अनियमितताओं की जांच के लिए समय-समय पर आयोग गठित किए गए, लेकिन उनकी रिपोर्टों पर कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है. कई आयोग अपनी जांच पूरी कर राज्य सरकार को प्रतिवेदन सौंप चुके हैं, इसके बावजूद वर्षों बाद भी न तो जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई हुई है और न ही अधिकांश रिपोर्ट्स विधानसभा के पटल पर रखी जा सकी हैं. इससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं|
2012 में आ चुकी है रिपोर्ट्स, लेकिन नहीं लिया गया फैसला
वर्ष 2008 में सामाजिक सुरक्षा पेंशन एवं राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना में अनियमितताओं की जांच के लिए जस्टिस एनके जैन की अध्यक्षता में आयोग गठित किया गया था. आयोग की रिपोर्ट 15 सितंबर 2012 को सरकार को मिल गई थी, लेकिन आज तक उस पर अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है. यह प्रतिवेदन भी विधानसभा में प्रस्तुत नहीं किया गया है. भिंड घटना की जांच के लिए 12 जुलाई 2012 को सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीपी कुलश्रेष्ठ की अध्यक्षता में आयोग बना. आयोग ने 31 दिसंबर 2017 को अपनी रिपोर्ट सौंपी और 17 जनवरी 2018 को यह गृह विभाग को भेजी गई. इसके बावजूद अब तक किसी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई सामने नहीं आई है|इसी तरह ग्वालियर के गोसपुरा नंबर दो मानमंदिर क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत की जांच के लिए 17 अगस्त 2015 को गठित आयोग ने 9 जनवरी 2017 को रिपोर्ट दे दी थी . मामला अब भी गृह विभाग में लंबित बताया जा रहा है . मंदसौर में 2017 की घटना की जांच के लिए 12 जून 2017 को गठित आयोग की रिपोर्ट 14 जून 2018 को गृह विभाग को भेजी गई . वहीं लटेरी में 2022 की गोलीबारी की जांच रिपोर्ट 10 दिसंबर 2025 को संबंधित विभाग को भेजी गई, लेकिन कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है|
केवल एक रिपोर्ट हुई पेश
25 अगस्त 2010 को गठित भोपाल यूनियन कार्बाइड गैस रिसाव जांच आयोग ने 24 फरवरी 2015 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी. इसके बावजूद यह प्रतिवेदन अब तक विधानसभा में पेश नहीं किया गया है. पेटलावद में मोहर्रम जुलूस रोके जाने की घटना की जांच रिपोर्ट ही एकमात्र ऐसी रिपोर्ट है, जिसे 5 जुलाई 2019 को विधानसभा में पटल पर रखा गया. हालांकि पेटलावद विस्फोट जांच आयोग की रिपोर्ट 2015 में सौंपे जाने के बावजूद अब भी अंतिम कार्रवाई की प्रतीक्षा में है|


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