पुस्तकीय ज्ञान के साथ समसामयिक जानकारी जरूरी : राज्यपाल पटेल
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि छात्र-छात्राओं को पुस्तकीय ज्ञान के साथ ही देश में हो रही प्रगति और विकास के बारे में समसामयिक जानकारी होना भी जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मन की बात कार्यक्रम ऐसी अद्भुत पहल है, जिसमें देश में हो रहे नवाचारों और प्रगति की जानकारी मिलती है। उन्होंने विश्वविद्यालयों के छात्रावासों में मन की बात कार्यक्रम के सामूहिक श्रवण की व्यवस्था करने के लिए भी कहा है।
राज्यपाल पटेल रविवार को बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में मन की बात के सामूहिक श्रवण कार्यक्रम के छात्र-छात्राओं को संबोधित कर रहे थे। सामूहिक श्रवण कार्यक्रम का आयोजन ज्ञान विज्ञान भवन में किया गया। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय आगमन पर ज्ञान विज्ञान भवन परिसर में पौधरोपण किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में विश्वविद्यालय की छात्राओं जैनस्वी शर्मा, खुशी सेन ने "हम उठे जग उठे", लक्ष्य गीत का गायन किया।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'मन की बात' और 'परीक्षा पे चर्चा' जैसे कार्यक्रम राष्ट्र जागरण की अभूतपूर्व पहल है। मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के द्वारा गरीब, वंचित और पिछड़े व्यक्तियों और क्षेत्रों के द्वारा देश-समाज के निर्माण में दिये जा रहे योगदान की जानकारी दी जाती है। इन प्रेरक प्रसंगों से आत्मबल से विकास और परिवर्तन के लिए समाज को आत्मविश्वास, प्रेरणा और उत्साह प्राप्त होती है। इसी तरह 'परीक्षा पे चर्चा' कार्यक्रम के द्वारा प्रधानमंत्री ने विद्यार्थी परीक्षा की कैसे तैयारी करें, पालक बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करें, इन सभी विषयों पर विस्तार से समझाइश देकर छात्र-छात्राओं पर अनावश्यक रूप से परीक्षा के समय बनने वाले भारी दबाव कम करने में बहुत मदद की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित भारत@2047 की नई पहल की है। आज़ादी की 100वीं वर्षगांठ पर राष्ट्र का स्वरूप कैसा होगा इस दिशा में विवेकानंद जयंती के अवसर पर नई पहल की है। देश भर के विद्यार्थियों से राष्ट्र के भावी स्वरूप के संबंध में उनके विचार प्राप्त किये। चयनित 3 हजार युवाओं के साथ नई दिल्ली में गोष्ठी भी की है।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि ज्ञान के साथ संस्कार से ही जीवन अच्छा जीवन होता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को संस्कार देना केवल शिक्षण संस्थाओं का दायित्व नहीं हो सकता। परिवार को भी बच्चों में संस्कार देने की जिम्मेदारी समझना होगी। बच्चे माता-पिता के आचरण से संस्कार ग्रहण करते हैं। परिवार का वातावरण संस्कारित होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ज्ञान से प्राप्त प्रगति अधूरी है। यदि उसमें अपने माता-पिता, राष्ट्र, समाज के प्रति सम्मान और सेवा का भाव नहीं है। उन्होंने कहा माता-पिता अपने बच्चों की अंगुली पकड़ कर चलना सिखाते हैं। वृद्धावस्था में उनके साथ दुर्व्यवहार करके कोई भी व्यक्ति, समाज और राष्ट्र उन्नति नहीं कर सकता है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में कुलगुरू एस.के. जैन ने स्वागत उद्बोधन दिया। आभार प्रदर्शन कुल सचिव डॉ. अनिल शर्मा ने किया। संचालन अधिष्ठाता छात्र कल्याण पवन मिश्रा ने किया।


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