सरगुजा में हड़ताली तहसीलदारों पर कलेक्टर की कड़ी चेतावनी
अंबिकापुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ में राजस्व अधिकारियों और सरकार के बीच चल रहा टकराव अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। सीतापुर के विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों द्वारा राजापुर के नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ की गई कथित मारपीट के विरोध में प्रदेश भर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। अधिकारियों के इस उग्र कदम के कारण राज्य की अधिकांश तहसीलों में जमीन की रजिस्ट्री, नामांतरण और प्रमाण पत्र जारी करने जैसे महत्वपूर्ण राजस्व कामकाज पूरी तरह ठप हो गए हैं, जिससे आम जनता दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है। इस बीच, प्रशासनिक गतिरोध को देखते हुए सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने हड़ताली अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।
सरगुजा कलेक्टर की दो टूक- काम पर लौटें वरना होगी प्रशासनिक कार्रवाई
हड़ताल के कारण चरमराई प्रशासनिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने एक सख्त अल्टीमेटम जारी किया है। कलेक्टर ने आंदोलनकारी तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे जनहित को ध्यान में रखते हुए तुरंत अपने-अपने काम पर वापस लौटें। कलेक्टर ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि अधिकारी काम पर नहीं लौटते हैं और हड़ताल जारी रखते हैं, तो उनके खिलाफ सेवा नियमों के तहत सख्त अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सियासी घमासान शुरू: कांग्रेस ने राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन, दी आंदोलन की चेतावनी
अधिकारियों और सत्ताधारी दल के विधायक के बीच उपजे इस विवाद में अब विपक्षी दल कांग्रेस की भी एंट्री हो गई है। कांग्रेस के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने जिला मुख्यालय पहुंचकर राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होने का दावा करते हुए राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान कांग्रेस के जिला अध्यक्ष बाल कृष्ण पाठक ने आरोप लगाया:
"सत्ता के रसूख में आकर भाजपा विधायक द्वारा सुनियोजित तरीके से अपने पारिवारिक स्वार्थ के लिए एक ऑन-ड्यूटी सरकारी अधिकारी पर जानलेवा हमला किया गया है। सूबे में कानून का राज खत्म हो चुका है। अगर सरकार ने इस हड़ताल को खत्म कराने और विधायक की गिरफ्तारी के लिए ठोस पहल नहीं की, तो कांग्रेस 5 दिनों के भीतर पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन शुरू करेगी।"
6 जून से ठप हो सकता है पूरा सिस्टम, प्राशसनिक सेवा संघ ने भी दी चेतावनी
यह विवाद केवल तहसीलदारों तक सीमित नहीं रह गया है। अब राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) के अधिकारियों के शीर्ष संगठन ने भी इस मामले में दखल दे दिया है। संगठन ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि आगामी 6 जून 2026 तक आरोपी विधायक रामकुमार टोप्पो की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो प्रदेश के सभी डिप्टी कलेक्टर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी सामूहिक रूप से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। यदि ऐसा होता है, तो राज्य का पूरा प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह ठप हो जाएगा।
जानिए क्या है इस पूरे हाई-वोल्टेज विवाद की इनसाइड स्टोरी?
यह पूरा मामला सीतापुर विधानसभा क्षेत्र के राजापुर का है। घटनाक्रम के अनुसार, पूरा विवाद एक कैदी की पैरोल से जुड़ा हुआ है:
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विवाद की वजह: सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो की सगी बहन सीमा धनकी के पति वर्तमान में हत्या के एक संगीन मामले में जेल में बंद हैं। सीमा अपने पति को पैरोल पर जेल से बाहर निकलवाने के लिए जरूरी कानूनी दस्तावेज तैयार करवाने राजापुर नायब तहसीलदार तुषार मानिक के दफ्तर पहुंची थीं।
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दुर्व्यवहार का आरोप: विधायक की बहन का आरोप है कि चैंबर में कार्य के दौरान नायब तहसीलदार ने उनके साथ अमर्यादित और अपमानजनक व्यवहार किया, जिससे आहत होकर वे दफ्तर में ही रोने लगीं और अपने भाई (विधायक टोप्पो) को फोन कर घटना की जानकारी दी।
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दफ्तर से बुलाकर मारपीट: आरोप है कि बहन के रोने की आवाज सुनकर आक्रोशित हुए विधायक ने अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से नायब तहसीलदार तुषार मानिक को राजापुर बुलवाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। आरोप है कि विधायक और उनके समर्थकों ने मिलकर नायब तहसीलदार की जमकर धुनाई कर दी।
इस घटना के बाद मामला बेहद पेचीदा हो गया है क्योंकि एक तरफ विधायक की बहन की शिकायत पर नायब तहसीलदार के खिलाफ दुर्व्यवहार का मामला दर्ज किया गया है, तो दूसरी तरफ पीड़ित नायब तहसीलदार की डॉक्टरी रिपोर्ट और तहरीर पर पुलिस ने विधायक रामकुमार टोप्पो व उनके समर्थकों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा और मारपीट की गंभीर धाराओं के तहत क्रॉस एफआईआर (FIR) दर्ज की है। फिलहाल अंबिकापुर, बिलासपुर और रायपुर के प्रशासनिक हलकों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है।


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