अमेरिका-ईरान वार्ता की उम्मीद से एशियाई बाजारों में जोश
नई दिल्ली। आंबेडकर जयंती के अवसर पर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार बंद रहे, लेकिन वैश्विक मोर्चे से निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत मिले हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के बावजूद, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीदों से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है, जिसके चलते एशियाई बाजारों ने बढ़त के साथ कारोबार किया है।
वैश्विक बाजार और कच्चे तेल का हाल
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान के बाद वैश्विक बाजार की धारणा में सुधार हुआ है, जिसमें उन्होंने तेहरान और वाशिंगटन के बीच कूटनीतिक बातचीत की संभावना जताई है। इसके प्रमुख प्रभाव इस प्रकार रहे:
कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता: भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण ब्रेंट क्रूड पहले 99.36 डॉलर प्रति बैरल तक उछल गया था, लेकिन अब यह नरमी के साथ लगभग 97.99 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।
अमेरिकी बाजारों में मजबूती: वॉल स्ट्रीट पर अमेरिकी बाजारों ने लचीलापन दिखाया है। S&P 500 ने 0.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की, जबकि इसके पिछले सत्र में यह 6,886.24 के उच्च स्तर पर बंद हुआ था। टेक-हैवी नैस्डैक में भी 0.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
एशियाई बाजारों में बढ़त: सकारात्मक वैश्विक संकेतों का अनुसरण करते हुए मंगलवार को जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 1.5 प्रतिशत चढ़ा।
भारतीय अर्थव्यवस्था और महंगाई पर असर
सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नाकेबंदी के आदेश के बाद भारतीय सूचकांक निफ्टी 50 और सेंसेक्स गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुए थे। इसके बावजूद, भारत के व्यापक आर्थिक आंकड़े राहत देने वाले हैं। क्रिसिल की प्रमुख अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा, "पश्चिम एशिया संकट को पूरा एक महीना होने के बावजूद, ऊर्जा संकट का खुदरा महंगाई पर अपेक्षाकृत कम प्रभाव दिखा है"। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपरिवर्तित रखने से खुदरा महंगाई दर ऊर्जा मूल्य वृद्धि के झटके से काफी हद तक सुरक्षित रही। बुधवार को जब भारतीय बाजार फिर से खुलेंगे, तो एक मजबूत शुरुआत की संभावना है। शुरुआती रुझानों में डेरिवेटिव्स बाजार में जीआईएफटी निफ्टी 1 प्रतिशत से अधिक उछलकर 24,126 पर पहुंच गया है। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ओर से मानसून के सामान्य से कम रहने के शुरुआती पूर्वानुमान से खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका बनी हुई है, जो भविष्य में निवेशकों की धारणा पर दबाव डाल सकती है।


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