करोड़ों- अरबों की संपत्ति वाले मंदिर, इन राज्यों के धार्मिक स्थलों की आय है हैरान करने वाली
गुजरात। भारत देश में कई ऐसे मंदिर है जहां लोग दर्शन करने के लिए लंबी-लंबी कतारों में लगते हैं. ऐसे ही कुछ प्रमुख मंदिरों की संपत्ति और आय को लेकर कुछ ताजा आंकड़े सामने आए हैं, जिन्होंने एक बार फिर धार्मिक स्थलों की संपत्ति को लेकर चर्चा तेज कर दी है. इनमें उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के मंदिरों ने अपनी अलग पहचान बनाई है।
यूपी के इन मंदिरों की 3,000 करोड़ से ऊपर की अनुमानित संपत्ति
उत्तर प्रदेश के मंदिरों में काशी विश्वनाथ मंदिर और राम मंदिर प्रमुख रूप से चर्चा में आते हैं. जहां साल भर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी होती है. काशी विश्वनाथ मंदिर की अनुमानित संपत्ति करीब 3,000 करोड़ रुपये लगाई गई है, जबकि यहां साल भर की आय 100 से 125 करोड़ रुपये के बीच मानी जा रही है, जो भक्तों के जरिए दान या चढ़ावे से आता है. वहीं अयोध्या का राम मंदिर जो अब आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है, उसकी कुल संपत्ति 6,000 से 9,000 करोड़ रुपये के बीच अनुमान लगाई गई है और सालाना आय करीब 300 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
सोमनाथ टेंपल की 40 से 55 करोड़ की सालाना आय
गुजरात के वेरावल में स्थित सोमनाथ टेंपल की बात करें तो यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहला और प्रमुख ज्योतिर्लिंग माना जाता है. यह मंदिर 'अमर ज्योतिर्लिंग' के रूप से भी प्रसिद्ध है, जो हिंदू आस्था का एक बड़ा केंद्र है. ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखने वाले सोमनाथ मंदिर की कुल संपत्ति करीब 1,100 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि इसकी सालाना आय 40 से 55 करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही है. यह मंदिर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के द्वारा दिए गए चढ़ावे और दान के कारण लगातार आर्थिक रूप से मजबूत बना हुआ है।
सिद्धिविनायक मंदिर की इतनी है संपत्ति
महाराष्ट्र में सिद्धिविनायक मंदिर का नाम प्रमुखता से सामने आता है. यह भगवान गणेश का एक अत्यंत प्रसिद्ध और 200 साल से अधिक पुराना मंदिर है. इसका निर्माण 19 नवंबर 1801 को लक्ष्मण विठ्ठू और देऊबाई पाटिल द्वारा किया गया था. मुंबई के इस प्रसिद्ध गणपति मंदिर की अनुमानित संपत्ति करीब 800 करोड़ रुपये है और इसकी सालाना आय लगभग 130 करोड़ रुपये के आसपास मानी जाती है. यह मंदिर देश के सबसे अधिक दान प्राप्त करने वाले धार्मिक स्थलों में गिना जाता है. इन आंकड़ों से यह होता है कि देश के प्रमुख मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी बेहद मजबूत बन चुके हैं।


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