SIR पहले चरण का असर, भोपाल में 4.38 लाख मतदाता सूची से होंगे बाहर
भोपाल | मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में SIR के पहले चरण की समय सीमा खत्म हो गई है. भोपाल के 21 लाख 25 हजार वोटर्स में से 79 परसेंट लोगों की मैपिंग हुई. पहली मतदाता सूची में से 4 लाख 38 हजार वोटर्स का नाम शामिल नहीं किया गया है. वहीं एक लाख 16 हजार मतदाताओं का कोई भी लिंक 2003 की मतदाता सूची में नहीं मिला है |
23 जनवरी को मतदाताओं की होगी सुनवाई
भोपाल एसआईआर प्रभारी भुवन गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि एसआईआर में पहले चरण में 35 हजार मृत मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से हटाया जाएगा | इसके अलावा एक लाख 16 हजार मतदाताओं को नो मैपिंग श्रेणी में रखा गया है. इन मतदाताओं को नोटिस देकर 23 जनवरी को इनकी सुनवाई की जाएगी. हर दिन प्रत्येक वार्ड में 50 मतदाताओं की सुनवाई की जाएगी. दावे और आपत्ति दर्ज कराने का काम 23 जनवरी से 16 फरवरी तक चलेगा. वार्ड में सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी बैठेंगे और मतदाताओं के नोटिस की सुनवाई करेंगे |
इन वजहों से मतदाताओं का नाम लिस्ट से गायब
एसआईआर प्रक्रिया के तहत घर-घर जाकर मतदाताओं की पहचान और रिकॉर्ड सत्यापन किया गया.इस दौरान पता चला कि हजारों लोग अपने पते पर नहीं मिले.कई मतदाता स्थान बदल चुके हैं या सूची में डुप्लीकेटनाम मौजूद थे. 35 हजार मृतक मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए जाने की तैयारी है |
वहीं एक लाख 16 हजार मतदाताओं को ‘नौ मैपिंग’ की श्रेणी में रखा गया है. जिसका अर्थ है कि इनके रिकॉर्ड को पिछली आधार सूची से मिलान नहीं किया जा सका है.
‘नो मैपिंग’ की श्रेणी को लेकर प्रशासन अलर्ट
तदाता सूची से नाम हटाने के फैसले पर राजनीतिक दलों और समाज में विभिन्न प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं. कुछ पक्ष इस प्रक्रिया को चुनावी तैयारी और सूची की गुणवत्ता सुधार का कदम मानते हैं, जबकि अन्य इसे संभावित विवाद का कारण भी मान रहे हैं |विशेष रूप से नो मैपिंग श्रेणी में पड़े मतदाताओं को सूचना देने की प्रक्रिया को लेकर प्रशासन सक्रिय है, ताकि कोई भी पात्र मतदाता अनजाने में सूची से बाहर न हो |


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