जब भगवान ने की चोरों के भागने में मदद... 700 साल पुराना रहस्यमयी मंदिर, हुई कई चमत्कारी घटनाएं!
जयपुर के आसपास छोटे-छोटे कस्बों और गांवों में कई वर्षों पुराने ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिर हैं. इनमें से एक मंदिर जयपुर शहर से 55 किलोमीटर दूर रूपाड़ी गांव में स्थित है. यहां का 700 वर्ष पुराना मंशा माता मंदिर अपने चमत्कारों और इतिहास की रोचक घटनाओं के कारण विशेष पहचान रखता है. इस मंदिर को चमत्कारी मंदिर के रूप में भी जाना जाता है.
यह मंदिर अरावली पर्वत श्रृंखला की एक पहाड़ी पर समुद्र तल से लगभग 700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. मंदिर तक पहुंचने के लिए 500 सीढ़ियों की चढ़ाई करनी पड़ती है. लोकल-18 टीम ने मंदिर पहुंचकर स्थानीय लोगों और पुजारी से बातचीत की. मंदिर के पुजारी पवन ने एक अनोखी घटना का जिक्र करते हुए बताया कि यह मंदिर चोरों की मदद से जुड़ी एक चमत्कारी घटना के लिए प्रसिद्ध है.
चोरों के लिए बना था पहाड़ी में रास्ता
पुजारी पवन बताते हैं कि वर्षों पहले गांव में चोरी करने के बाद चोर इस मंदिर पर पहुंचे. गांववालों ने उन्हें घेर लिया और उनके भागने का कोई रास्ता नहीं बचा. तभी माता के मंदिर की पहाड़ी के बीचोंबीच एक संकरा रास्ता बन गया जिससे चोर वहां से बचकर निकलने में सफल रहे. इस घटना के बाद मंदिर का नाम मंशा माता मंदिर पड़ गया. आज भी यह रास्ता मौजूद है जिसे ‘चोर गली’ कहा जाता है. यहां से एक बार में केवल एक व्यक्ति ही निकल सकता है.
मंदिर में स्थित है चमत्कारी अंध कुंआ
मंदिर परिसर में स्थित एक अंध कुंए से जुड़ी एक और चमत्कारी घटना भी चर्चित है. बताया जाता है कि एक बार एक बंजारा पूजा करने आया और उसका सोने का कटोरा उस कुएं में गिर गया. रात में मंशा माता ने सपने में बंजारे को बताया कि उसका कटोरा निवाई के एक मंदिर के कुंड में मिलेगा. लेकिन माता ने यह भी चेताया कि वहां कई कटोरे होंगे और उसे केवल अपना कटोरा ही लेना है. बंजारा लालचवश अन्य कटोरे भी साथ ले आया. इसके बाद उसकी पत्नी का निधन हो गया. दुखी होकर वह माता के मंदिर में क्षमा मांगने आया. फिर उसने मंदिर की पहाड़ी के लिए सात सीढ़ियों का निर्माण करवाया जो आज भी मंदिर में मौजूद हैं.
अवैध खनन के चलते हुई थी मृत्यु की घटना
यह मंदिर एक भव्य पहाड़ी पर स्थित है जिसे मनसा डूंगरी के नाम से जाना जाता है. स्थानीय लोग बताते हैं कि एक बार एक ठेकेदार ने इस पहाड़ी पर अवैध खनन शुरू किया. लोगों ने विरोध किया लेकिन वह नहीं रुका. कुछ समय बाद उसके बेटे की मृत्यु हो गई. लोगों का मानना है कि यह माता की शक्ति का परिणाम था. आज भी इस पहाड़ी पर खनन की गई चट्टानें वैसे की वैसे पड़ी हैं.
सवामणी की परम्परा और सामूहिक आयोजन
मंदिर की प्राकृतिक छटा मन को शांति देती है. यहां मनोकामना पूर्ण होने के बाद सवामणी चढ़ाने की परम्परा है. हर वर्ष 56 गांवों के लोग मिलकर सामूहिक सवामणी का आयोजन करते हैं. यह आयोजन मंदिर परिसर में विशेष आस्था और उल्लास के साथ होता है.
ओलावृष्टि से बचाने की मान्यता
मंदिर से जुड़ी एक और मान्यता यह है कि मंशा माता प्राकृतिक आपदाओं से गांव की रक्षा करती हैं. स्थानीय लोग बताते हैं कि आज तक रूपाड़ी गांव में तेज ओलावृष्टि नहीं हुई. किसी को कभी नुकसान नहीं पहुंचा. गांव में बारिश नहीं होने की स्थिति में सामूहिक रूप से माता का पूजन किया जाता है. लोगों का विश्वास है कि इसके बाद अच्छी वर्षा होती है. इसलिए हर साल गांववाले बारिश के लिए विशेष पूजा का आयोजन करते हैं.


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