मुंबई: देश के प्रमुख प्रतिभूति बाजार नियामक ने एक बड़ी मीडिया कंपनी और उसके शीर्ष प्रबंधन से जुड़े दिग्गजों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है. नियामक की तरफ से जारी आदेश के अनुसार, तय अवधि तक ये सभी लोग प्रतिभूति बाजार में किसी भी प्रकार के वित्तीय लेन-देन या कारोबार से पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे.

नियमों के उल्लंघन पर लगाया गया भारी आर्थिक जुर्माना

नियामक संस्था की ओर से दिए गए निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि कंपनी और उसके प्रमुख पदाधिकारियों पर नियमों की अनदेखी करने के एवज में लाखों रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई गई है ताकि कॉरपोरेट जगत में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके.

ऑडिट रिपोर्ट में संपत्ति के कागजात गायब होने से हुआ था बड़ा खुलासा

इस पूरे मामले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब कंपनी के स्वतंत्र ऑडिटर्स ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कुछ महत्वपूर्ण अचल संपत्तियों के मूल दस्तावेज गायब होने की बात सामने रखी. इस खुलासे के बाद नियामक ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी थी कि क्या कंपनी के स्तर पर लिस्टिंग नियमों का कोई उल्लंघन हुआ है.

विभिन्न कंपनियों के माध्यम से लिए गए कर्ज और गिरवी रखे गए दस्तावेज

जांच में यह बात सामने आई कि प्रमोटर परिवार से जुड़ी कुछ अन्य संस्थाओं ने एक वित्तीय संस्थान से भारी मात्रा में ऋण लिया था. ऋण की शर्तों को पूरा करने के लिए कंपनी की हैदराबाद में स्थित एक बेशकीमती संपत्ति के मूल दस्तावेज अतिरिक्त सुरक्षा गारंटी के तौर पर उस वित्तीय संस्थान के पास जमा करवा दिए गए थे.

बिना आवश्यक कॉर्पोरेट मंजूरियों के संपत्ति को गिरवी रखने का मामला

नियामक की जांच में यह भी पाया गया कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स, ऑडिट कमेटी या शेयरधारकों से किसी भी प्रकार की आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी. हालांकि दस्तावेजों में यह दावा किया गया था कि सभी जरूरी मंजूरियां प्राप्त कर ली गई हैं, लेकिन आंतरिक प्रबंधन इस मॉर्टगेज से पूरी तरह अनजान बना रहा.