बाजार की अनिश्चितता में कहां लगाएं पैसा? जानिए सुरक्षित रिटर्न वाले विकल्प
नई दिल्ली। नौकरी से रिटायर होने के बाद अपनी जीवनभर की पूंजी को सही जगह निवेश करना किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे बड़ा फैसला होता है। दिल्ली के रहने वाले रमेश मित्तल ने भी पिछले साल सेवानिवृत्त होने पर अपने फंड का एक बड़ा हिस्सा ऊंचे रिटर्न की चाह में स्मॉलकैप और मिडकैप म्यूचुअल फंड में लगा दिया था। शुरुआत में तो पोर्टफोलियो चमकता हुआ दिखा और अच्छा मुनाफा भी हुआ, लेकिन हाल ही में शेयर बाजार में आई भारी उथल-पुथल ने उस पूरे मुनाफे को पल भर में साफ कर दिया। इस गिरावट से रमेश मित्तल इतने परेशान हो गए कि उनकी रातों की नींद उड़ गई। अब वे बेहद अफसोस के साथ सोच रहे हैं कि काश उन्होंने यह गाढ़ी कमाई पीपीएफ (पब्लिक प्रॉविडेंट फंड) या सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम जैसी सरकारी छोटी बचत योजनाओं में लगाई होती, जहां लॉक-इन पीरियड की बंदिश भले ही होती है, लेकिन मूलधन डूबने का खतरा पूरी तरह शून्य रहता है।
घबराहट के दौर में लघु बचत योजनाएं बनती हैं अचूक कवच
जब भी वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव या आर्थिक सुस्ती के चलते शेयर बाजार औंधे मुंह गिरने लगता है, तब निवेशकों का सुरक्षित ठिकानों की तरफ भागना स्वाभाविक है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में सुकन्या समृद्धि योजना, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (एनएससी) और पीपीएफ जैसी योजनाएं निवेशकों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित होती हैं। बहुत से लोग इन योजनाओं के लंबे लॉक-इन पीरियड को एक कमी के तौर पर देखते हैं, लेकिन असल में यह एक व्यावहारिक अनुशासन की तरह काम करता है। यह कड़ा नियम आपको बाजार की तात्कालिक गिरावट और हलचल को देखकर घबराहट में कोई भी गलत या जल्दबाजी भरा फैसला लेने से मजबूती से रोकता है।
सरकारी योजनाओं के वो मजबूत स्तंभ जो देते हैं मानसिक शांति
इन छोटी बचत योजनाओं की लोकप्रियता के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण छिपे हैं। पहला कारण है संपूर्ण संप्रभु सुरक्षा, क्योंकि म्यूचुअल फंड में आपका पैसा फंड मैनेजर की सूझबूझ और बाजार की चाल पर निर्भर करता है, जबकि सरकारी योजनाओं में आपकी पूंजी और तय रिटर्न दोनों की शत-प्रतिशत गारंटी सीधे भारत सरकार की होती है। दूसरा बड़ा फायदा है बाजार के उतार-चढ़ाव से पूरी तरह दूरी, जिससे इन योजनाओं पर शेयर बाजार की मंदी का कोई असर नहीं पड़ता और हर तिमाही इनकी ब्याज दरों की समीक्षा की जाती है। तीसरा स्तंभ इसका लॉक-इन पीरियड है जो निवेशकों को लंबे समय के लक्ष्यों से भटकने नहीं देता। यह योजनाएं उन लोगों के लिए बिल्कुल मुफीद हैं जो अपने मूलधन पर जरा सा भी जोखिम नहीं चाहते, जो रिटायरमेंट के बाद निश्चित आय की तलाश में हैं, या जो अपनी बेटियों की पढ़ाई और शादी के लिए एक सुरक्षित कोष तैयार करना चाहते हैं। इसके अलावा पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत धारा 80सी का लाभ लेने वालों के लिए भी यह बेहतरीन जरिया है।
निवेश के अलग-अलग विकल्पों का गणित और बाजार का सच
यदि हम बाजार के विभिन्न फिक्स्ड-इनकम विकल्पों की तुलना करें, तो सरकारी लघु बचत योजनाएं फिलहाल 7.1% से 8.2% तक का सुरक्षित रिटर्न दे रही हैं और इनमें पीपीएफ व सुकन्या समृद्धि जैसी योजनाएं पूरी तरह से टैक्स-फ्री (EEE) श्रेणी में आती हैं। इसके मुकाबले बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में 6.5% से 7.7% का रिटर्न मिलता है जो पूरी तरह टैक्स योग्य होता है और केवल 5 लाख रुपये तक ही बीमित रहता है। वहीं डेट म्यूचुअल फंड पूरी तरह से बाजार के जोखिमों के अधीन होते हैं।
हालांकि वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक डर के कारण अपने पूरे पैसे को 15 साल के लिए पूरी तरह ब्लॉक कर देना भी समझदारी नहीं है। यदि देश में महंगाई दर 6 से 7 फीसदी के आसपास है, तो टैक्स के बाद इन सरकारी योजनाओं का वास्तविक रिटर्न बेहद मामूली रह जाता है, जिससे आपके पैसे की क्रय शक्ति यानी सामान खरीदने की क्षमता नहीं बढ़ पाती। इसके उलट, इतिहास गवाह है कि 10 से 15 साल की लंबी अवधि में इक्विटी मार्केट या फ्लेक्सीकैप फंड्स ने महंगाई को पछाड़ते हुए औसतन 12 से 14 फीसदी तक का कंपाउंडेड रिटर्न दिया है।
बेहतर भविष्य के लिए अपनाएं संतुलित बास्केट रणनीति
इस पूरी स्थिति को देखते हुए समझदारी इसी में है कि निवेशक न तो अति-उत्साह में आकर अपना सारा पैसा सीधे शेयर बाजार या स्मॉलकैप में झोंके और न ही अत्यधिक डर के कारण उसे पूरी तरह पारंपरिक योजनाओं में बंद करें। एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य के लिए सबसे सटीक रास्ता यह है कि आप एक संतुलित बास्केट रणनीति तैयार करें। इसके तहत अपनी कुल पूंजी का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा पूर्ण सुरक्षा के लिए सरकारी लघु बचत योजनाओं में रखें, और बाकी बचे 40 प्रतिशत हिस्से को एक अनुशासित एसआईपी (SIP) के माध्यम से अच्छे म्यूचुअल फंड में निवेश करें, ताकि लंबे समय में आपका पैसा महंगाई को मात देकर एक बड़ा और मजबूत फंड बन सके।


राशिफल 05 जुलाई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
जश्न में फायरिंग पड़ी भारी, बिहार में BJP विधायक को कोर्ट ने सुनाई सजा
गुजरात में पीएम मोदी बोले- सेमीकंडक्टर सेक्टर में दुनिया का भरोसा जीत रहा भारत
चंदौसी: शिक्षिका की मौत के बाद वकील पर FIR, सुसाइड नोट बना अहम सबूत
जनता को जल्द इंसाफ दिलाने की दिशा में बिहार सरकार का अहम निर्णय
जमीन विवाद में गर्भवती महिला पर हमले से दो अजन्मे बच्चों की मौत, इलाके में आक्रोश
बटाला फायरिंग केस: धमकी और गोलियों से दहला इलाका, जांच जारी
कथित चंदा चोरी केस में बड़ा खुलासा: चार्टर्ड प्लेन से सिंडिकेट के आका, ट्रेन से ले जाया गया रामलला का सोना!
मानसून सत्र की तारीखों का ऐलान: 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा संसद का सत्र
क्या कानून बचा सकता है एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर के आरोपी पति को? सुप्रीम कोर्ट ने दिया अहम फैसला