चुनावी मैदान में उतरेंगे नेता, पांच राज्यों के चुनाव में सौंपी जाएगी जिम्मेदारी
नई दिल्ली/भोपाल। मप्र के विधायक और नेता इन दिनों राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार कर रहे हैं। विधायक आस लगाए हुए हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार हो और उन्हें मंत्री बनाया जाए। वहीं नेताओं को इतजार है कि जल्द से जल्द निगम, मंडल, प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियां हो, ताकि सत्ता का सुख उन्हें मिल सके। हालांकि इसके लिए वे करीब डेढ़ साल से इंतजार कर रहे हैं। अब भाजपा सूत्रों को कहना है कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने से पहले अगर मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियां हो गई तो ठीक है वर्ना अगले साल ही विधायकों और नेताओं की मंशा पूरी होने की संभावना है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के साथ ही असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा आलाकमान इन चुनावों में मप्र के मंत्रियों, विधायकों और नेताओं को तैनात करेगा। यानी अगले महीने से भाजपा पूरी तरह चुनाव में लग जाएगी। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि अगर मप्र में मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियां अभी नहीं हुईं तो अगले साल तक इंतजार करना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि 2021 में चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोट 27 मार्च को वोटिंग कराई थी। आखिरी चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को हुई थी। असम में असम में 27 मार्च, 1 और 6 अप्रैल को वोट डाले गए थे। तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में तब 6 अप्रैल को वोट डाले गए थे।
जून में राज्यसभा चुनाव की बाधा
गौरतलब है कि प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियां बार-बार टलती जा रही हैं। पहले मप्र भाजपा अध्यक्ष चुनाव, फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष, चुनाव, कभी विधानसभा सत्र आड़े आते रहे। अब पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद मप्र में राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होना है। ऐसे में नियुक्तियों का मामला अटका रहेगा। उसके बाद अगले साल होने वाले नगरीय निकाय की तैयारी में पार्टी व्यस्त हो जाएगी। हालांकि सूत्रों का कहना है कि सत्ता और संगठन ने मिलकर राजनीतिक नियुक्तियों का खाका तैयार कर लिया है। संभावना जताई जा रही है कि होली के बाद निगम-मंडल, बोर्ड और प्राधिकरणों में अध्यक्ष-उपाध्यक्षों की सूची जारी कर दी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व से नियुक्तियों को लेकर पहले ही हरी झंडी मिल चुकी है। पिछले कुछ महीनों में प्रदेश सरकार और भाजपा संगठन के बीच इस विषय पर कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। बताया जा रहा है कि संभावित नामों पर दिल्ली स्तर पर भी चर्चा हुई है और संघ के साथ भी कुछ नामों को लेकर विचार-विमर्श किया गया है। इसके बाद अब नियुक्तियों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
लंबे समय से नियुक्तियों का इंतजार
मप्र में लंबे समय से खाली पड़े निगम-मंडल, बोर्ड और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। भाजपा संगठन और सरकार ने मिलकर संभावित नामों की सूची तैयार कर ली है और होली के बाद पहली सूची जारी होने की संभावना जताई जा रही है। इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी संगठन को मजबूत करने और वरिष्ठ नेताओं के साथ सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पद संभालने के बाद प्रदेश के सभी संभागों का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों से मुलाकात कर संगठन को मजबूत बनाने पर जोर दिया था। साथ ही उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया था कि पार्टी में सक्रिय रहने वाले किसी भी कार्यकर्ता की उपेक्षा नहीं होने दी जाएगी। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठन विस्तार और राजनीतिक संतुलन बनाने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है।


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