अजित पवार की मौत के बाद कौन संभालेगा NCP की कमान… इन चार नेताओं पर नजरें!
मुम्बई। महाराष्ट्र (Maharashtra) के उप मुख्यमंत्री (Deputy Chief Minister) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (Nationalist Congress Party- NCP) के मुखिया अजित पवार (Ajit Pawar) की विमान हादसे में दर्दनाक मौत ने न सिर्फ राज्य की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है बल्कि उनकी पार्टी एक ऐसे असमंजस भरे मोड़ पर आ खड़ी हुई है, जिसके भविष्य पर अटकलों का बाजार गर्म हो चुका है। राजनीतिक विश्लेषकों का भी इस पर अलग-अलग मत है। कुछ का मानना है कि पार्टी का देर-सबेर शरद पवार (Sharad Pawar) गुट वाले NCP में विलय हो सकता है क्योंकि खुद अजित पवार इसकी अगुवाई कर रहे थे, तो दूसरी तरफ कुछ जानकारों का कहना है कि फिलहाल पार्टी महायुति गठबंधन का हिस्सा ही बनी रहेगी।
पार्टी की अगुवाई कौन करेगा, इस पर भी संशय के बादल हैं। हालांकि, कमोबेश सभी विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी की कमान पवार परिवार के पास ही रहेगा। चेहरा भले ही सुनेत्रा पवार हों या पार्थ पवार या फिर कोई और पवार लेकिन पर्दे के पीछे पार्टी के कुछ नेता सभी अहम फैसले कर सकते हैं। राजनीतिक जानकार ये भी कह रहे हैं कि NCP के सामने फिलहाल दो रास्ते हैं, पहला, परिवार और सहानुभूति आधारित नेतृत्व का और दूसरा अनुभव और संगठनात्मक मजबूती पर आधारित फैसला। उनके मुताबिक, डिप्टी सीएम पद केवल सम्मान का सवाल नहीं, बल्कि महायुति सरकार की स्थिरता और 2029 की चुनावी रणनीति से भी जुड़ा है।
चार चेहरे कौन?
ऐसे में अंतिम फैसला सिर्फ NCP के भीतर नहीं, बल्कि भाजपा नेतृत्व और गठबंधन समीकरणों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा। दरअसल, अजित पवार की राजनीतिक विरासत भारी है और उसी विरासत को संभालने के लिए NCP को अब भावना और व्यवहारिक राजनीति के बीच संतुलन साधना होगा। इन सबके बीच पार्टी के चार चेहरों का जिक्र होने लगा है, जो संकटमोचक बनकर उभर सकते हैं। अजित पवार गुट के पास इस वक्त 41 विधायक हैं। स्पष्ट उत्तराधिकारी न होने की स्थिति में पार्टी किसी अनुभवी नेता को आगे कर सकती है। इस कड़ी में चार बड़े नाम सामने हैं:
प्रफुल्ल पटेल
प्रफुल्ल पटेल NCP के सबसे वरिष्ठ और कद्दावर नेताओं में गिने जाने जाते हैं। पार्टी विभाजन के समय प्रफुल्ल पटेल अजित पवार के साथ मजबूती से खड़े रहे। उनके पास केंद्र और राज्य दोनों स्तरों का अनुभव है। उनकी एक राष्ट्रीय पहचान है और महायुति में भी स्वीकार्यता है। इसलिए वह एक संतुलित विकल्प बनकर उभर सकते हैं। 1957 में जन्मे, पटेल को पूर्व केंद्रीय मंत्री के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने यूपीए सरकार में नागरिक उड्डयन और भारी उद्योग जैसे महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला है। वे शरद और अजित पवार के करीबी माने जाते रहे हैं। एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष और पार्टी में दूसरे नंबर की हैसियत के साथ वह महाराष्ट्र के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय रहे हैं। छह बार सांसद रहे हैं।
छगन भुजबल
ओबीसी (माली) समुदाय से आने वाले छगन भुजबल के पास करीब 40 वर्षों का राजनीतिक अनुभव है। उनके पास मजबूत ओबीसी आधार है। वह मराठी राजनीति में पिछड़ा वर्ग की प्रभावी आवाज और NCP के सबसे अनुभवी चेहरों में एक हैं। अजित पवार के साथ उनके खड़े रहने से यह संकेत भी मिलता है कि पार्टी उन्हें भरोसेमंद मानती है। वह दो बार डिप्टी सीएम भी रह चुके हैं। मौजूदा फडणवीस सरकार में वह मंत्री हैं। उन्होंने 1960 के दशक में शिवसेना के साथ सियासी सफर की शुरुआत की, मुंबई के मेयर रहे, और बाद में एनसीपी में शामिल हो गए।
धनंजय मुंडे
मराठवाड़ा और बीड क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाले धनंजय मुंडे संगठन और गठबंधन दोनों में संतुलन साधने की क्षमता रखते हैं। भाजपा नेतृत्व से उनकी नजदीकी और महायुति में उनकी भूमिका उन्हें पावर ब्रिज के रूप में स्थापित करती है। वह दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे के भतीजे हैं, जिन्होंने अपनी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया है। वे महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता, सामाजिक न्याय मंत्री, और बीड जिले के पालक मंत्री (Guardian Minister) रह चुके हैं। एक सरपंच की हत्या के मामले में नाम आने के बाद पिछले साल मार्च 2025 में उन्होंने महाराष्ट्र सरकार में मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।
सुनील तटकरे
सुनील तटकरे फिलहाल NCP के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष हैं और लोकसभा में पार्टी के इकलौते सांसद हैं। तटकरे संगठनात्मक दृष्टि से बेहद मजबूत माने जाते हैं। कोकण क्षेत्र में उनकी पकड़ और विधानसभा–लोकसभा दोनों में अनुभव उन्हें पार्टी का स्थिर चेहरा बना सकता है। वह वे राज्य सरकार में वित्त, जल संसाधन और ऊर्जा जैसे कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाल चुके हैं।


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