शरीर के लिए अमृत से कम नहीं बाबा बागनाथ पर चढ़ी ये चीज, कई रोगों का रामबाण इलाज!
बागेश्वर: उत्तराखंड के बागेश्वर का बाबा बागनाथ मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक परंपराओं के लिए पूरे प्रदेश में जाना जाता है. माघ महीने में मकर संक्रांति के बाद यहां भगवान शिव के शिवलिंग पर शुद्ध देसी घी का एक मोटा आवरण चढ़ाया जाता है, जिसे स्थानीय लोग “घी की गुफा” कहते हैं. यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है, बल्कि इसके औषधीय लाभ भी है.
मंदिर के पंडित हेम चन्द्र पाठक बताते हैं कि माघ माह की कड़ाके की ठंड में भगवान शिव शीत निद्रा में होते हैं और कठोर तपस्या में लीन रहते हैं. इसी कारण उन्हें ठंड से बचाने के लिए शिवलिंग को शुद्ध घी से ढका जाता है. समय के साथ यह घी शिवलिंग के चारों ओर जमकर गुफा का रूप ले लेता है, जिसे “घृत कमल” भी कहा जाता है. इस एक महीने की अवधि में शिवलिंग पर रहने से यह घी भगवान शिव की दिव्य ऊर्जा को ग्रहण कर लेता है.
श्रद्धालुओं को दिया जाता है प्रसाद
यह परंपरा सदियों पुरानी है. हर वर्ष मकर संक्रांति के बाद घी चढ़ाने की शुरुआत होती है और फाल्गुन महीने की शुरुआत यानि महाशिवरात्रि के आसपास इस घी की गुफा को विधि-विधान से हटाया जाता है. इसके बाद इस घी को मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में दिया जाता है. हालांकि यह प्रसाद सामान्य प्रसादों से बिल्कुल अलग होता है.
इसे न तो खाने के लिए दिया जाता है और न ही इससे दीपक जलाया जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस घी का उपयोग केवल शरीर पर लगाने के लिए किया जाता है. यह घी चर्म रोगों जैसे खुजली, दाद, फोड़े-फुंसी और त्वचा की अन्य समस्याओं में काफी लाभकारी होता है. प्रभावित स्थान पर इसे लगाने से रोग में राहत मिलती है.
इन समस्याओं का रामबाण इलाज
इसके अलावा सिर दर्द, माइग्रेन और सिर से जुड़ी अन्य परेशानियों में भी इस घी को रामबाण माना जाता है. श्रद्धालु इसे हल्के हाथों से सिर या शरीर पर लेप के रूप में लगाते हैं. बाबा बागनाथ मंदिर की यह परंपरा आज भी जीवांत है. जहां धर्म और पारंपरिक चिकित्सा की मान्यताएं एक साथ देखने को मिलती हैं. यदि आप भी इस घी को अपने घर लेकर जाना चाहते हैं, तो आप फाल्गुन महीने की शुरुआत में मंदिर समिति से संपर्क कर सकते हैं. मंदिर समिति के अध्यक्ष नंदन रावल के घर से प्राप्त कर सकते हैं.


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