शिव पूजा के समय पढ़ें यह प्रदोष व्रत कथा, मिलेगा सुख, सौभाग्य और उपवास का पूरा फल!
माघ माह के कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत है. इस व्रत में भगवान शिव की पूजा करते हैं और प्रदोष व्रत कथा सुनते हैं. कथा सुनने से व्रत पूरा होता है, उसका महत्व पता चलता है और व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है. प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त शाम में 05 बजकर 47 मिनट से शुरू है, जो रात 08 बजकर 29 मिनट तक है. इस समय में आपको प्रदोष व्रत की पूजा कर लेनी चाहिए. प्रदोष करने से सभी प्रकार के कष्ट और रोग मिटते हैं. भगवान शिव की कृपा से धन, संतान, सुख, संपत्ति, सौभाग्य की प्राप्ति होगी. आइए जानते हैं शुक्र प्रदोष व्रत कथा के बारे में.
शुक्र प्रदोष व्रत कथा
शुक्र प्रदोष की पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में 3 दोस्त रहते थे. तीनों में बहुत अच्छी दोस्ती थी. उन तीनों मित्रों में से एक सेठ का बेटा, एक राजा का बेटा और एक ब्राह्मण का बेटा था. राजा और ब्राह्मण के बेटे का विवाह हो चुका था. वे दांपत्य जीवन में सुखी थे, लेकिन सेठ के बेटे का विवाह हो चुका था पर गौना होना बाकी थर.
एक दिन की बात है. तीनों दोस्त आपस में महिलाओं के बारे में बातें कर रहे थे. उसी बीच ब्राह्मण के बेटे ने कहा कि जिस घर में महिला नहीं होती है, उसमें भूतों का डेरा होता है. उसकी बात को सुनकर सेठ का बेटा अपने बारे में सोचने लगा. उसने अपनी पत्नी को गौना कराकर घर लाने का फैसला किया. वह अपने घर गया और अपने फैसले के बारे में पिता को बताया.
इस पर सेठ ने बेटे से कहा कि इस समय शुक्र अस्त हैं. इस वजह से ऐसे समय में बहु या बेटी को घर से विदा नहीं किया जाता है. ऐसे में तुम्हारी पत्नी को घर लाना शुभ नहीं है. शुक्र के उदय होने के बाद ससुराल जाना और पत्नी को विदा कराके घर लाना. लेकिन उसने पिता की बात नहीं सुनी और अपने ससुराल पहुंच गया.
उसने अपने सास और ससुर से पत्नी को विदा करने को कहा. लेकिन उन दोनों ने अपने दामाद को समझाने की कोशिश की. लेकिन वह नहीं माना. दामाद के आगे विवश होकर उन्होंने बेटी को विदा कर दिया. सेठ का बेटा पत्नी को साथ लेकर नगर से बाहर ही निकला था, तभी उसकी बैलगाड़ी का पहिया और एक बैल की टांग टूट गई.
इस घटना में पत्नी को भी चोटें आई. लेकिन उसके बाद भी सेठ का बेटा नहीं रूका. वह पत्नी को साथ में लेकर आगे बढ़ता रहा. रास्ते में कुछ डाकुओं ने उन दोनों को घेर लिया. वे उनका सारा धन लेकर भाग गए. धन लूट जाने से सेठ का दुखी पुत्र घर पहुंचा. तो उसी समय एक सांप ने उसे डस लिया.
सेठ ने एक वैद्य बुलाया, उसने देखा तो कहा कि यह व्यक्ति 3 दिन का मेहमान है, उसके बाद इसकी मृत्यु हो जाएगी. जब यह बात उसके ब्राह्मण दोस्त को पता चली तो वह उसके घर आया. उसने सेठ से कहा कि वह अपनी बहु को उसके पति के साथ मायके वापस भेज दो. शुक्र अस्त हैं और ऐसे में बहु को लाने की वजह से ऐसा हुआ है. यदि बहु अपने पति के साथ मायके पहुंच जाएगी तो शायद उसकी जान बच जाए.
सेठ ने तुरंत अपने बेटे को बहु के साथ उसके घर भेज दिया. ससुराल पहुंचते ही सेठ के बेटे की सेहत में सुधार होने लगा. उसके बाद से उसका बेटा जीवित हो गया. उसने पत्नी के साथ सुखी जीवन व्यतीत किया. मृत्यु के बाद दोनों को स्वर्ग की प्राप्ति हुई.


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