जेपी अस्पताल में मरीज को दी फंगस वाली दवा, शिकायत के बाद CMHO ने गठित की जांच कमेटी
भोपाल: छिंदवाड़ा में जहरीली कफ सिरप से बच्चों की मौत की त्रासदी अभी मध्य प्रदेश भूला भी नहीं था कि राजधानी भोपाल से स्वास्थ्य विभाग की एक और खतरनाक तस्वीर सामने आ गई है. छिंदवाड़ा में जहरीली सिरप से करीब 24 बच्चों की मौत के बाद सरकार ने सुधार के बड़े दावे किए थे. लेकिन अब मॉडल अस्पताल जयप्रकाश चिकित्सालय में मरीज को फंगस लगी दवा दिए जाने का मामला उन दावों की पोल खोल रहा है. यह घटना न सिर्फ लापरवाही बल्कि आम लोगों की जान के साथ खुलेआम खिलवाड़ को उजागर करती है.
छिंदवाड़ा के बाद भोपाल में लापरवाही
अक्टूबर 2025 में छिंदवाड़ा जिला पूरे देश में सुर्खियों में रहा था. जहरीली कफ सिरप पीने से मध्य प्रदेश में करीब 24 बच्चों की मौत हो गई थी. इस मामले ने प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में हड़कंप मचा दिया था. प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए सिरप फैक्ट्री के मालिक को गिरफ्तार किया और स्वास्थ्य विभाग में सुधार के दावे किए गए. लेकिन कुछ ही महीनों बाद राजधानी भोपाल से सामने आई घटना ने साफ कर दिया कि जमीनी हकीकत अब भी नहीं बदली है.
जयप्रकाश अस्पताल का मामला
ताजा मामला भोपाल के जिला अस्पताल जयप्रकाश चिकित्सालय का है. यहां शुक्रवार शाम हड्डी रोग से संबंधित इलाज कराने पहुंचे एक मरीज को जेपी अस्पताल की फार्मेसी से ऐसी दवा दी गई, जिस पर साफतौर पर सफेद फंगस जमी हुई थी. यह घटना सामने आते ही अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया.
पीड़ित मरीज सतीश सेन शुक्रवार शाम करीब 5 बजे पैर में चोट के बाद जेपी अस्पताल की ओपीडी पहुंचे थे. उन्होंने फ्रैक्चर की आशंका जताई. अस्थि रोग विभाग में उस समय कोई वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद नहीं था. काफी देर इंतजार के बाद इंटर्न डॉक्टरों ने मरीज को देखा और दर्द की दवा लिखी. साथ ही एक्सरे कराने की सलाह दी.
फफूंद लगी दवा की शिकायत की
मरीज को जेपी अस्पताल की फार्मेसी से दर्द की एक नामी कंपनी की टैबलेट दी गई और उसे लेकर वे घर लौट गए. घर पहुंचकर जब उन्होंने दवा की स्ट्रिप को ध्यान से देखा तो अधिकांश गोलियों पर सफेद फफूंद जमी हुई थी. मरीज का कहना है कि यदि वह दर्द के कारण जल्दबाजी में दवा खा लेता तो उसकी सेहत को गंभीर नुकसान हो सकता था. मरीज सतीश सेन ने इस पूरे मामले की शिकायत सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा को ई मेल के जरिए भेजी है. शिकायत के साथ खराब दवा की तस्वीरें भी संलग्न की गई हैं. मरीज ने इसे महज लापरवाही नहीं बल्कि मरीज की जान से खिलवाड़ बताया है. उन्होंने सवाल उठाया है कि ऐसी स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी.
स्टोरेज और चेन सप्लाई की लापरवाही उजागर
चौंकाने वाली बात यह है कि जिस दवा में फफूंद पाई गई. उसकी एक्सपायरी जून 2027 है. यह दवा बैच नंबर डीएसएम 25002 के तहत अक्टूबर 2025 में एमपी पब्लिक हेल्थ सर्विस कॉर्पोरेशन लिमिटेड के माध्यम से जेपी अस्पताल को सप्लाई की गई थी. इससे साफ है कि मामला एक्सपायरी का नहीं बल्कि दवाओं के स्टोरेज और सप्लाई चेन में गंभीर लापरवाही का है.
सीएमएचओ ने गठित की जांच कमेटी
सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि "फंगस लगी दवा मिलने की ऑनलाइन शिकायत मिली है. मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है. इसके लिए डॉक्टरों की एक कमेटी भी बनाई गई है. रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी."


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