यासीन मछली केस में न्यायपालिका सक्रिय, विध्वंस कार्रवाई पर उठाए सवाल
भोपाल के गैंगस्टर यासीम अहमद उर्फ मछली की दादी और परिवार के अन्य सदस्यों की तरफ से जिला और पुलिस प्रशासन के द्वारा उसके मकान को ध्वस्त किये जाने तथा बैंक खाते को फ्रीज किए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने 24 घंटों में भोपाल कलेक्टर तथा डीसीपी क्राइम को कार्रवाई संबंधित दस्तावेज के साथ न्यायालय में उपस्थित होने के आदेश जारी किये हैं। याचिका पर शुक्रवार 26 सितंबर को सुनवाई निर्धारित की गई है।
भोपाल के गैंगस्टर यासीन अहमद उर्फ मछली की दादी तथा परिवार के अन्य सदस्यों की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उन्हें सरकारी भूमि पर निर्माण करने के लिए निशाना बनाया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं के अलावा अन्य लोगों ने भी सरकारी भूमि पर निर्माण किया था और वर्षों से निवासरत हैं। जिला और पुलिस प्रशासन के द्वारा निशाना बनाते हुए सिर्फ उनकी संपत्तियों को ध्वस्त किया है। इसके अलावा किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। संपत्तियों को ध्वस्त करने से पहले याचिकाकर्ताओं को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था। इसके अलावा उनके बैंक खाते फ्रीज कर दिये हैं और शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। ईमेल आईडी ब्लॉक कर दी गई है, जिसके कारण वह कोई भी व्यावसायिक गतिविधि करने की स्थिति में नहीं है।
याचिका की सुनवाई के दौरान एकल पीठ की तरफ से पूछा गया कि याची किस मामले में आरोपी हैं। सरकार अधिवक्ता की तरफ से बताया गया कि मामले अधिकारियों के पास जांच के लिए लंबित हैं, वह अभी तक किसी भी मामले में आरोपी नहीं है। एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि संपत्ति के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को प्रमाणित करने के लिए रिटर्न के साथ कोई भी सामग्री प्रस्तुत नहीं की गई है। इस संबंध में सरकार अधिवक्ता की तरफ से कहा गया कि उनके पास संपूर्ण रिकॉर्ड नहीं हैं, इसलिए पूर्ण और विस्तृत जवाब दाखिल नहीं किया जा सका। तहसीलदार द्वारा एमपीएलआरसी 1959 की धारा 248 के तहत पारित आदेश के तक संपत्ति को ध्वस्त किया गया है।
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि संपत्ति के विध्वंस की कार्रवाई के संबंध में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। जोकि अतिरिक्त महाधिवक्ता द्वारा इस न्यायालय के समक्ष दिए गए वचन पत्र और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संरचनाओं के विध्वंस के मामले में दिए गए निर्देशों (सुप्रा) के मामले में पारित निर्णय का उल्लंघन है। प्रतिवादियों की कार्रवाई से याचिकाकर्ताओं को खतरा है और वह व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने में असमर्थ हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 का उल्लंघन है। एकलपीठ ने कलेक्टर तथा डीसीपी अपराध शाखा भोपाल को कार्रवाई संबंधित दस्तावेज के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश जारी किये हैं।


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