ट्रंप प्रशासन के एच-1बी वीजा आदेश में डॉक्टरों और मेडिकल रेजिडेंट्स को मिल सकती हैं राहत
वाशिंगटन । अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से पेश किए गए एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर (करीब 88 लाख रुपये) की नई फीस ने आईटी और मेडिकल सेक्टर में भूचाल ला दिया है। इस बीच अमेरिका से भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए कुछ हद तक राहत वाली खबर आई है। व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि डॉक्टरों और मेडिकल रेजिडेंट्स को भारी-भरकम फीस से छूट दी जा सकती है। व्हाइट हाउस प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने कहा, ‘प्रोक्लेमेशन में संभावित छूट का प्रावधान है, इसमें डॉक्टर और मेडिकल रेजिडेंट्स शामिल हो सकते हैं। दरअसल, इस फीस को लेकर अमेरिकी मेडिकल संगठनों ने चेतावनी दी थी कि इससे विदेशी डॉक्टरों का आना रुक जाएगा, खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में जहां मरीज पहले से ही डॉक्टरों की कमी झेल रहे हैं।
अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष बॉबी मुक्कामला ने फैसले को भयावक बताकर कहा कि ‘यह फैसला मरीजों की जिंदगी पर सीधा असर डाल सकता है। ट्रंप प्रशासन ने बीते हफ्ते एच-1बी वीजा की फीस को कई गुना बढ़ाने की घोषणा की थी। इसके पीछे दलील दी गई कि केवल असाधारण स्किल वाले प्रोफेशनल्स को ही अब वीजा मिलना चाहिए, ताकि कंपनियां सस्ते विदेशी कर्मचारियों को रखकर अमेरिकी कर्मचारियों को बाहर न करें। अमेरिका के कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लटनिक ने इस ‘जरूरी सुधार’ बताकर कहा कि पहले वीजा पॉलिसी से औसत से कम वेतन पाने वाले कर्मचारी अमेरिका में बस जाते थे और सरकारी मदद पर निर्भर हो जाते थे।
लेकिन फैसले का सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक, 71 प्रतिशत एच-1बी वीजा धारक भारतीय हैं। इसमें से ज्यादातर आईटी सेक्टर में काम करते हैं और बड़ी कंपनियां जैसे इंफोसिस, विप्रो, कॉग्निजेंट और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) इसी वीजा प्रोग्राम के ज़रिए अपने इंजीनियर्स अमेरिका भेजती हैं। अब नए नियमों के बाद, कंपनियों को हर तीन साल (वीजा अवधि) पर एक कर्मचारी के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। यह भारत की 250 अरब डॉलर की आईटी इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही यह खबर आई, अमेरिका में लिस्टेड भारतीय आईटी कंपनियों के शेयर 2 से 5 प्रतिशत तक गिर गए। आईटी विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह नियम सख्ती से लागू हुआ, तब भारतीय टैलेंट की अमेरिका में मौजूदगी पर गहरा असर पड़ेगा। वहीं, ट्रंप का कहना है कि इस फीस से अमेरिका को 100 अरब डॉलर से ज्यादा की आमदनी होगी, जो राष्ट्रीय कर्ज कम करने और टैक्स घटाने में मदद करेगी।


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