पोस्टमार्टम हाउस में रिश्वतखोरी का सनसनीखेज मामला, 500 रुपए में मिला शव; परिजन ने सीएम तक पहुंचाई शिकायत
ग्वालियर: मध्य प्रदेश के इंदौर में चूहों के काटने से बच्चों की मौत का मामला अभी शांत नहीं हुआ था कि अब ग्वालियर के हजार बिस्तर वाले सरकारी अस्पताल से अमानवीयता का एक मामला सामने आ गया है। बीजेपी नेता ने एक पोस्ट के जरिए बताया है कि एक युवक की मौत के बाद पोस्टमार्टम हाउस में परिजनों से कफन के लिए 500 रुपए लिए गए।
सड़क हादसे में घायल हुआ युवक
दरअसल, पूरा मामला मुरैना का है। यहां एक कृष्णा श्रीवास नाम का युवक अपनी चाची को बाइक पर लेकर कहीं जा रहा था। तभी रास्ते में किसी गाड़ी ने उसे टक्कर मार दिया। जिससे कृष्णा के पैर में फ्रैक्चर हो गया। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। चाची ने 1 सितंबर को दम तोड़ दिया। युवक को ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में रेफर किया गया। जहां पर 3 सितंबर को उसकी भी मौत हो गई।
मृतक के मामा ने लगाया गंभीर आरोप
मृतक कृष्णा के मामा पवन सेन बीजेपी पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी हैं। उन्होंने भांजे की मौत का जिम्मेदार अस्पताल को ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि डॉक्टरों ने दो दिन बाद भी पैर में प्लास्टर नहीं चढ़ाया। बार-बार कहने के बाद भी कोई सीनियर डॉक्टर देखने नहीं आया। उसका सारा इलाज जूनियर डॉक्टरों ने की। उन्होंने कहा कि अस्पताल के अधीक्षक डॉ सुधीर सक्सेना के इस बात की जानकारी दी गई। उनसे कहा कि यदि इलाज संभव नहीं है तो प्राइवेट अस्पताल रेफर कर दें। लेकिन उन्होंने बेहतर इलाज का भरोसा दिया। डॉक्टरों की लापरवाही से कृष्णा की मौत हो गई।
फेसबुक पोस्ट से सीएम को बताई सच्चाई
भांजे की मौत पर बीजेपी नेता पवन सेन ने फेसबुक पर अपना दुख प्रकट किया। उन्होंने पोस्ट के माध्यम से मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा कि ग्वालियर ट्रामा सेंटर का भगवान मालिक है। मुख्यमंत्री मोहन यादव जी होटल, फैक्ट्री से पहले अस्पताल अच्छे बनाने पर ध्यान दीजिए।
नीली पन्नी वाले कफन के 500 रुपए
उन्होंने अगले पोस्ट में लिखा कि सरकारी डॉक्टरों के बंगले पर दुकान बंद करवाइए मुख्यमंत्री मोहन यादव जी। सड़क दुर्घटना में मृतक से कफन के पैसे मत मांगो सरकार। मुख्यमंत्री मोहन यादव जी ध्यान दीजिए। परिजनों का दर्द तब और बढ़ गया जब पोस्टमार्टम हाउस में कर्मचारियों ने नीली पन्नी वाले कफन के लिए 500 रुपये मांगे। परिजनों ने अधीक्षक से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार 500 रुपए देकर शव घर ले जाया गया।
अस्पताल अधीक्षक ने क्या कहा?
वहीं, जेएएच अधीक्षक डॉ. सुधीर सक्सेना ने कहा कि इलाज में लापरवाही और कफन के पैसे मांगने के आरोपों पर विभाग प्रमुखों से जवाब मांगा गया है. लिखित जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।


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