भोपाल नगर निगम में हर महीने खर्च होते हैं 13 करोड़ 85 लाख, 25 प्रतिशत कर्मचारी हर दिन गैर हाजिर
भोपाल। राजधानी भोपाल नगर निगम में अजब-गजब मामला सामने आया है। कर्मचारी तो हैं लेकिन सिर्फ कागजों पर, दफ्तर में सालों साल गायब रहते हैं। बिना ड्यूटी के करोड़ों रुपये की सैलेरी हर महीने निकल रही है। कर्मचारी सालों से ना तो दफ्तर पहुंचे है और ना ही फील्ड पर आए। वहीं अधिकारी गोल मोल जवाब देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।
12 हजार 400 अस्थायी कर्मचारी
नगर निगम भोपाल में 12 हजार 400 अस्थायी कर्मचारी हैं। कर्मचारियों की सैलरी पर हर महीने 13 करोड़ 85 लाख रुपए खर्च होते हैं। करीब 25% कर्मचारी रोज ड्यूटी से गायब रहते हैं। 25 प्रतिशत कर्मचारियों में से कुछ ऐसे हैं, जो न तो निगम जाते हैं न फील्ड में जाते हैं। कुछ गायब कर्मचारी वे हैं, जो रिटायर अफसरों, नेताओं, पार्षदों के घरों पर काम कर रहे हैं। सैलरी बाकायदा निगम के खाते से जा रही है। निगम के माता मंदिर दफ्तर परिसर में शिक्षा एवं खाद्य शाखा में जब विस्तार न्यूज़ की टीम पहुंची तो शाखा का लॉक तो खुला मिला लेकिन कर्मचारी नदारद थे। शिक्षा शाखा छोड़कर बाकी शाखाएं खुली मिलीं. शिक्षा शाखा में निगम के रिकॉर्ड में 08 कर्मचारी तैनात हैं। निगम उपायुक्त सीबी मिश्रा की पत्नी सरोज लिपिक (विनियमित) के पद पर हैं, इनकी बेटी नीतू तिवारी भी 29 दिवसीय कर्मचारी के तौर तैनात हैं। यहां कुछ को 30-30 हजार और कुछ महीने 12-12 हजार रुपए सैलरी मिलती है।
रैन बसेरा में भी कर्मचारी गैर हाजिर
नगर निगम के रैनबसेरा में भी कर्मचारियों के नाम पर सैलरी जाती है। लेकिन कर्मचारी कभी ऑफिस पहुंचते ही नहीं है। नगर निगम कमिश्नर का कहना है कि कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। हाजिरी सार्थक ऐप पर लगती है, इसलिए किसी भी गड़बड़ी का कोई सवाल ही नहीं है।जब सार्थक ऐप से हाजिरी को लेकर पड़ताल की तो कर्मचारियों ने खुद कहा कि सार्थक ऐप से अटेंडेंस सालों से नहीं लगी है और केवल रजिस्टर में ही समय नोट किया जाता है। ऐसे में सवाल यही है कि आखिर अधिकारी गड़बड़ियों पर आंखें बंद करके क्यों बैठे हैं और कर्मचारियों की मनमानी पर लगाम लगाने में कोताही क्यों बरत रहे हैं।


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