ओबीसी आरक्षण पर सियासी संग्राम: कांग्रेस ने MP सरकार को घेरा
भोपाल: मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है. बीते एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर सुनवाई हुई है, अब आखिरी फैसला 4 जुलाई को होना है. इससे पहले ही कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरने की योजना बना ली है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर ओबीसी समुदाय के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण तत्काल लागू करने की मांग की है.
मांग पूरी नहीं होने पर प्रदेशभर में होंगे आंदोलन
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि, ''यदि बीजेपी सरकार ने इस मांग को अनसुना किया या फिर से कोर्ट का बहाना बनाया, तो मध्य प्रदेश कांग्रेस ओबीसी समाज के साथ मिलकर आंदोलन शुरू करेगी. हम हर जिले, हर तहसील और हर गांव में बीजेपी के इस ओबीसी विरोधी चेहरे को उजागर करेंगे. बीजेपी को इसका जवाब देना होगा, और यह जवाब जनता की ताकत से आएगा.''
कमलनाथ ने 14 से बढ़ाकर किया था 27 प्रतिशत आरक्षण
पटवारी ने कहा कि, ''भाजपा सरकार अपनी ओबीसी विरोधी साजिश को अंजाम देने में जुटी है. साल 2019 में कांग्रेस सरकार ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में ओबीसी आरक्षण को 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का फैसला लिया था.'' पटवारी ने कहा कि, ''यह निर्णय विधानसभा और कैबिनेट से मंजूरी पाकर लागू हुआ था, ओबीसी समाज के उत्थान और समानता का प्रतीक था. लेकिन बीजेपी ने सत्ता हथियाने के बाद इस हक को छीनने का घिनौना षड्यंत्र रचा.''
6 साल से 27 प्रतिशत आरक्षण नहीं कर रही सरकार
बता दें कि, मध्य प्रदेश विधानसभा द्वारा 14 अगस्त 2019 को ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून पारित किया गया था. इस पर स्थगन का कोई आदेश भी नहीं है. इसके बाद भी राज्य सरकार मार्च 2019 के अंतरिम आदेश के आधार पर ओबीसी को निर्धारित आरक्षण लागू नहीं कर रही है.
हालांकि इस मामले में सीएम डॉ. मोहन यादव का कहना है कि, ''ओबीसी आरक्षण को लेकर उनकी सरकार का रुख स्पष्ट है, उन्होंने कहा कि ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के स्टैंड पर हम कायम भी हैं.''
सुप्रीम कोर्ट में होगी 4 जुलाई को सुनवाई
दरअसल, मध्य प्रदेश विधानसभा द्वारा कानून बना दिए जाने के बाद भी आरक्षण लागू नहीं किए जाने से ओबीसी वर्ग में नाराजगी है. ओबीसी उम्मीदवारों ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर तत्काल राहत देने की मांग की है. अब इस मामले में निर्णायक फैसला आना बाकी है. जो 4 जुलाई को आएगा. बता दें कि ओबीसी आरक्षण पर स्पष्टता नहीं होने की वजह से एमपीपीएससी सहित प्रदेश की अन्य सरकारी भर्तियों में चयन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है.


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