माणा: भारत का पहला गांव, जो समेटे है सरस्वती नदी और पौराणिक इतिहास का खजाना
नई दिल्ली। घूमने के शौकीन लोगों के लिए अपने देश भारत में ही कई सारी जगह मौजूद हैं। यहां कई ऐसी जगह हैं, जो अपनी खूबसूरती के साथ-साथ खासियत के लिए भी जानी जाती हैं। इन्हीं में से एक उत्तराखंड है, जिसे देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। यहां की खूबसूरती देखने लोग दूर-दूर से यहां आते हैं। नैनीताल, मसूरी जैसे खूबसूरत हिल स्टेशन तो हर कोई घूमने जाता है, लेकिन क्या आपने कभी भारत के पहले गांव के बारे में सुना है।
यह गांव कई मायनों में बेहद खास है। यह न सिर्फ खूबसूरत है, बल्कि एक ऐतिहासिक जगह भी है। अगर आप अभी तक नहीं समझ पाए हैं कि हम किस गांव की बात कर रहे हैं, तो आपको बता दें कि हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड के माणा गांव की, जो सिर्फ घूमने के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक मान्यताओं की वजह से भी खास है। आइए जानते हैं इस गांव की खासियत-
क्यों खास है माणा गांव?
उत्तराखंड के चमोली जिले में मौजूद माणा गांव भारत-तिब्बत सीमा के बहुत नजदीक है। इतना ही नहीं इस जगह की दूरी बद्रीनाथ धाम से सिर्फ 3 किलोमीटर की है। यह गांव इतिहास और संस्कृति का खजाना है, जिसके कण-कण में अतीत की झलक देखने को मिलती है। इसकी एक खासियत यह भी है कि यह भारत की इकलौती ऐसी जगह है, जहां सरस्वती नदी देखने को मिलती है। साथ ही इस जगह को लेकर यह भी कहा जाता है कि यह गांव स्वर्ग जाने का रास्ता है।
कैसे पड़ा माणा गांव नाम?
इस गांव का नाम मणिभद्र देव के नाम पर माणा रखा गया है। यह धरती पर इकलौती ऐसी जगह मानी जाती है, जिसे चारों धाम से भी पवित्र माना जाता है। इस गांव को शापमुक्त और पापमुक्त माना जाता है। इतना ही नहीं यहां के लिए एक मान्यता यह भी है कि पांडव जब स्वर्ग की ओर जा रहे थे, तो वह इसी गांव से होकर गुजरे थे। यहां पर एक भीम पुल भी मौजूद है, जिसे लेकर मान्यता है कि रास्ते के एक झरने को पार करने के लिए भीम ने चट्टान फेंक कर पुल बनाया था।
खूबसूरती का भंडार है माणा गांव
धार्मिक और पौराणिक मान्यता के अलावा यह जगह अपनी खूबसूरती के लिए भी जाना जाता है। हिमालय के पहाड़ों से घिरा हुआ यह गांव आप भी अपनी नेचुरल ब्यूटी के लिए जाना जाता है। आप यहां कई सारी खूबसूरत जगहों का दीदार कर सकते हैं। इसमें वसुंधरा फॉल्स, व्यास गुफा, तप्त कुंड, सरस्वती नदी आदि शामिल हैं।


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