ओडिशा के मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का मामला, दो हाउस सर्जनों पर 25-25 हजार का जुर्माना
ओडिशा: ओडिशा में एक मेडिकल कॉलेज में रैगिंग करने का मामला सामने आया है. यहां सरकार द्वारा संचालित एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में दो हाउस सर्जनों पर चौथे वर्ष के MBBS छात्र की कथित रैगिंग के आरोप में 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है. अधिकारियों ने बताया कि कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी ने सोमवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया है. एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल सुचित्रा दास ने बताया, 'हमें एंटी-रैगिंग सेल से 12 मई को हाउस सर्जनों द्वारा चौथे वर्ष के MBBS छात्र की रैगिंग करने की शिकायत मिली थी. शिकायतों मिलने के बाद उनपर चर्चा के लिए एंटी-रैगिंग कमेटी की बैठक आयोजित की गई.'
मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल ने क्या कहा?
सुचित्रा दास ने बताया, 'बैठक में इस मामले पर गहन विचार विमर्श के बाद समिति ने इस घटना में शामिल दो हाउस र्जनों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का फैसला किया है.' दास ने बताया कि आंतरिक जांच के बाद एंटी रैगिंग पैनल को पता चला कि पीड़ित के साथ शारीरिक रूप से मारपीट नहीं की गई थी, बल्कि उसे मानसिक रूप से परेशान किया गया था.
प्रधानाचार्य ने बताया कि इसी के अनुरूप समिति ने शिकायत में जिन हाउस सर्जनों के नाम का उल्लेख किया गया था, उनके खिलाफ जुर्माना लगाने का फैसला किया. इसे लेकर बरहामपुर के एसपी सरवण विवेक एन ने कहा कि पुलिस इस घटना के बारे में अलग से जांच कर रही है. अगर मामला गंभीर हुआ तो वे रैगिंग के दिशानिर्देशों के अनुसार मामला दर्ज करेंगे. बता दें कि फिलहाल हाउस सर्जनों पर रैगिंग के मामले में शिष्टाचार और नैतिकता के उल्लंघन के आधार पर जुर्माना लगाया गया है. समिति के एक सदस्य ने कहा कि यूजीसी के दिशानिर्देशों के मुताबिक, हाउस सर्जनों के सजा दी गई है.
भारत में रैगिंग का कानून क्या कहता है?
भारत में रैगिंग को गंभीर अपराध माना जाता है और इसके खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधान हैं. यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) और भारत सरकार ने रैगिंग को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. रैगिंग करने पर कॉलेज स्तर पर निलंबन, निष्कासन, या हॉस्टल से निष्कासन जैसी सजा हो सकती है.
रैगिंग के मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 294, 323, 341, 506 आदि के तहत भी कार्रवाई हो सकती है, जिसमें 7 साल तक की जेल और जुर्माना शामिल है. वहीं गंभीर मामलों में पुलिस शिकायत दर्ज की जा सकती है. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, रैगिंग-रोधी समितियां सभी शिक्षण संस्थानों में अनिवार्य हैं.


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